देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अंतिम सूची जारी होते ही सूबे की सियासत में भूचाल आ गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का सीधा आरोप है कि दूसरे राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी यह पूरी कवायद पात्र मतदाताओं को परेशान करने और उनके नाम सूची से बाहर करने का सुनियोजित षड्यंत्र साबित हुई है। Uttarakhand voter list controversy पर कांग्रेस ने आंकड़ों के साथ मोर्चा खोल दिया है।
राजधानी देहरादून में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस SIR समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश सचिव अमरेंद्र सिंह बिष्ट और समिति सदस्य संदीप चमोली ने संयुक्त रूप से आंकड़े पेश किए। नेताओं ने आंकड़ों की बाजीगरी और प्रशासनिक स्तर पर बरती गई कथित अनियमितताओं के दस्तावेज भी सार्वजनिक किए।
Uttarakhand voter list controversy: 13.89 लाख नाम गायब होने का दावा
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, जनवरी 2025 में उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या 85,19,271 थी। इसके बाद प्री-SIR और SIR के विभिन्न चरणों से गुजरते हुए अक्टूबर 2026 में अंतिम सूची आई। पार्टी ने हैरानी जताई कि 2014 के लोकसभा चुनाव में 68.83 लाख और 2017 के विधानसभा चुनाव में 75.92 लाख मतदाता थे — जनसंख्या लगातार बढ़ी, लेकिन पिछले नौ महीनों में ही 13.89 लाख सामान्य मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो गए। कांग्रेस का कहना है कि यह किसी बड़े झोल की ओर इशारा करता है।
दरअसल, कांग्रेस का तर्क है कि जब आबादी बढ़ रही है तो मतदाताओं की संख्या घटनी नहीं चाहिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना सामान्य प्रक्रिया का नतीजा नहीं हो सकता, और इसके पीछे सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
फर्जी फॉर्म-7 और स्वतः सृजित आपत्तियों का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंटों ने हजारों की संख्या में फर्जी फॉर्म-7 भरकर गरीब, अनुसूचित जाति-जनजाति और कम पढ़े-लिखे लोगों के नाम कटवाने की साजिश रची। राज्यभर में कुल 96,704 आपत्तिकर्ताओं ने फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया, लेकिन कागजी और कानूनी विरोध के बाद केवल 7,523 नाम ही काटे जा सके।
इसके अलावा चुनाव आयोग के सिस्टम द्वारा ‘तार्किक विसंगतियों’ के नाम पर 97,186 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। कांग्रेस का आरोप है कि जवाब न मिलने पर आयोग के सिस्टम ने खुद-ब-खुद फॉर्म-7 सृजित कर दिए, जिससे बिना किसी सुनवाई के हजारों पात्र मतदाताओं के नाम काट दिए गए। हरिद्वार ग्रामीण के बूथ संख्या 65 (सराय) का हवाला देते हुए नेताओं ने बताया कि वहां दस्तावेज अपलोड होने के बावजूद 123 मतदाताओं के नाम काट दिए गए, जबकि वे मतदाता पूरी तरह वैध रूप से मौजूद थे।
BLO की तारीफ, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
विवादों के इस दौर में कांग्रेस ने मैदानी स्तर पर काम करने वाले बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और खासकर आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की कार्यकुशलता और निष्पक्षता की जमकर तारीफ की। पार्टी का कहना है कि अत्यधिक तकनीकी और जटिल काम के बावजूद मैदानी कर्मचारियों ने ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाई, लेकिन दिल्ली से नियंत्रित चुनाव आयोग की केंद्रीकृत प्रणाली के कारण स्थानीय अधिकारी चाहकर भी राहत नहीं दे पा रहे हैं।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया की खामियों के कारण छूटे मतदाताओं को फॉर्म-6 के जरिए दोबारा जोड़ने में कानूनी अड़चनें हैं, क्योंकि पहले से दर्ज वैध मतदाता को नया वोटर घोषित करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मनमानी पर रोक नहीं लगी तो वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी, और इस पूरे मामले में कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।









