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हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

चारधाम से हर की पैड़ी तक गूंजेगी देववाणी: संस्कृत को गांवों की रोजमर्रा की भाषा बनाएगा उत्तराखंड

On: October 8, 2026 10:29 PM
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

देहरादून। देवभूमि में अब देववाणी सिर्फ मंदिरों के श्लोकों और किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य सरकार ने तय किया है कि Sanskrit Gram Yojana Uttarakhand को अब गांवों की रोजमर्रा की बोलचाल में उतारा जाएगा। बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि गांवों में होने वाले कार्यक्रम किसी खास दिन या मौके तक सिमटकर न रह जाएं, बल्कि साल के बारहों महीने संवाद, पाठ और दूसरी रचनात्मक गतिविधियां चलती रहें।

मुख्यमंत्री का कहना था कि भाषा तभी जिंदा रहती है, जब वह लोगों की जुबान पर हो। इसलिए अधिकारियों से ठोस और निरंतर प्रयास करने को कहा गया है, ताकि नई पीढ़ी का जुड़ाव अपनी जड़ों से और मजबूत हो सके। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि संरक्षण और संवर्धन से जुड़े अच्छे कामों के लिए धन की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।

बच्चों से शुरू होगी देववाणी की वापसी

बैठक में सबसे ज्यादा जोर बच्चों पर रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटी उम्र से ही विद्यार्थियों को वेद, उपनिषद और पुराणों जैसी धरोहर से परिचित कराया जाना चाहिए। दरअसल, कठिन लगने वाले इन ग्रंथों को बच्चों की उम्र और रुचि के हिसाब से आसान और रोचक माध्यमों में ढालने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पढ़ने में मन भी लगे और समझ भी आसानी से आए।

उन्होंने कहा कि अच्छी पढ़ाई के साथ अच्छे संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं। संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति की मजबूत नींव बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही भाषा नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम बन सकती है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन परंपरा हमेशा पूरे संसार की भलाई, आपसी भाईचारे और इंसानियत की सीख देती आई है, और यही सोच हर बच्चे तक पहुंचनी चाहिए।

तीर्थों पर श्लोकों के सरल अर्थ, श्रद्धालुओं को मिलेगा सीधा जुड़ाव

धार्मिक स्थलों को भी इस मुहिम से जोड़ने का फैसला लिया गया है। हर की पैड़ी और चारों धामों के अलावा जागेश्वर धाम, बागेश्वर के पूर्णागिरि शक्तिपीठ, आदि कैलाश क्षेत्र, टिहरी की सुरकंडा देवी, पौड़ी की धारी देवी, नैनीताल का गर्जिया मंदिर और ऋषिकेश का वीरभद्र धाम — इन सभी प्रमुख तीर्थों पर प्रेरक वाक्य और श्लोक उनके आसान अर्थ के साथ प्रदर्शित किए जाएंगे।

असल में मकसद यह है कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भाषा से सीधे जुड़ सकें और उसका भाव भी आसानी से समझ सकें। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि संस्कृत राज्य की दूसरी राजभाषा है, इसलिए इसके प्रचार को रफ्तार देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर गांव और तीर्थ दोनों जगह साफ दिखाई दे।

कुंभ के लिए हरिद्वार की अलग कार्ययोजना, 13 जिलों में आदर्श गांव

आने वाले कुंभ को देखते हुए हरिद्वार के लिए अलग से बड़ी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के सामने भारतीय ज्ञान परंपरा को नए और आकर्षक तरीके से रखने का यह सबसे बड़ा अवसर होगा। इसके लिए अभी से ठोस तैयारी शुरू करने और अभिनव पहल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दुनिया भर से आने वाले लोग हमारी सांस्कृतिक विरासत को करीब से देख और समझ सकें।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक आदर्श गांव की शुरुआत हो चुकी है, जहां भाषा को रोज की बोलचाल का हिस्सा बनाने पर काम चल रहा है। पढ़ने वाले बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए गार्गी बालिका छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रवृत्ति और छात्र प्रतिभा सम्मान जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। साथ ही शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटल संरक्षण, वैदिक अध्ययन और आधुनिक तकनीक में भाषा के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए आयोग गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

बैठक में हरिद्वार स्थित विश्वविद्यालय के कुलपति समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अगर ये फैसले जमीन पर उसी रफ्तार से उतरते हैं, जिस रफ्तार से इनकी घोषणा हुई है, तो आने वाले दिनों में देवभूमि की पहचान में देववाणी की गूंज और तेज सुनाई देगी।

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