खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को खटीमा पहुंचे, जहां उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र गोसीकुआ भुड़ाई में आयोजित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्ने बच्चों को दुलार किया, अपने हाथों से उन्हें भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर आत्मीयता से समय बिताया। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, माताओं और आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं से संवाद कर उन्होंने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत भी जानी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि Aangan Milan Khatima जैसा कार्यक्रम सेवा, स्नेह और संवाद को हर व्यक्ति और हर घर तक पहुंचाने का माध्यम है, और प्रदेशभर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ बच्चों को पोषण देने वाले केंद्र नहीं हैं, बल्कि उनके स्वस्थ भविष्य, संस्कार, प्रारंभिक शिक्षा और सर्वांगीण विकास की नींव रखने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
गोदभराई की रस्म, गर्भवती महिलाओं को पोषण किट
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गोदभराई की रस्म में हिस्सा लेकर गर्भवती महिलाओं को आशीर्वाद दिया और 10 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार की किट वितरित की। इसके साथ ही 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट प्रदान की गई। धामी ने अपने हाथों से 5 नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया।
इस अवसर पर 9 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 2 आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बच्चों की देखभाल और पोषण के साथ-साथ सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने समृद्धि और हरियाली के प्रतीक के रूप में पौधरोपण भी किया।
आंगनबाड़ी से भावनात्मक जुड़ाव, पीएम मोदी के 25 वर्ष बताए प्रेरणादायी
अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके स्वयं के बच्चे भी नगला तराई स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़े हैं, इसलिए इन केंद्रों से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण किए हैं।
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सभी वर्गों के कल्याण और राष्ट्रहित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, और कर्मयोगी व साधक के रूप में उनका कार्य, समर्पण और सेवा भाव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य एवं पोषण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महालक्ष्मी किट योजना, पोषण योजनाओं और मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के जरिए माताओं और बच्चों को आवश्यक सहायता व पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।
कोई बच्चा कुपोषित न रहे: सरकार का विकल्परहित संकल्प
मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा के लिए बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था की जा रही है, और जरूरत पड़ने पर हेली एंबुलेंस की सुविधा भी दी जाती है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं, जबकि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से गर्भवती व धात्री महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान पौष्टिक आहार, उचित देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा और अच्छे संस्कार मिलें तो बच्चे के स्वस्थ व सशक्त भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है। बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का विकल्परहित संकल्प है कि उत्तराखंड में कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे और हर बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित व संस्कारयुक्त वातावरण मिले। जब सरकार, समाज और परिवार तीनों मिलकर माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी निभाते हैं, तो सशक्त उत्तराखंड की नींव और मजबूत होती है।















