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चुनाव आयोग पर कांग्रेस का बड़ा हमला: देहरादून में सचिवालय घेराव, मुख्य निर्वाचन आयुक्त से इस्तीफे की मांग

On: September 25, 2026 6:28 PM
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

देहरादून: शुक्रवार को उत्तराखंड की राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी अचानक बढ़ गई, जब प्रदेश कांग्रेस ने भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए सचिवालय का घेराव कर दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की उपेक्षा का आरोप लगाया और उनके तुरंत इस्तीफे के साथ गिरफ्तारी की मांग उठाई। विरोध के दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन कार्यालय के सामने मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पुतला दहन भी किया।

यह विरोध प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित हुआ था। कांग्रेस मुख्यालय से निकला पैदल मार्च नारेबाजी करता हुआ सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय पहुंचा। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में जुटे जनसैलाब को देखकर प्रशासन भी सकते में आ गया। पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपा और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर गंभीर आरोप

विरोध के दौरान कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। नेताओं के अनुसार उत्तराखंड के कई विधानसभा क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कुछ लोग भारी संख्या में ‘फॉर्म-7’ भर रहे हैं, ताकि विपक्ष के समर्थक मतदाताओं के नाम कटवाए जा सकें।

पार्टी का कहना है कि जो व्यक्ति संबंधित मतदाता का पड़ोसी या स्थानीय निवासी तक नहीं है, वह इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां कैसे दर्ज करा सकता है। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसे सभी आवेदनों की विधानसभा और बूथ स्तर पर जांच हो और उनकी सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही जब तक बीएलओ घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन न कर लें, तब तक किसी भी नागरिक का नाम सूची से न हटाया जाए।

आयोग में मतभेद के दावे

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के भीतर दो आयुक्तों की असहमति को नजरअंदाज कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार एकतरफा निर्णय ले रहे हैं। पार्टी के मुताबिक निर्वाचन आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर ऐसा संकट पहले कभी नहीं आया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकतंत्र की नींव जनता के मत पर टिकी है, और यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में ही पक्षपात नजर आए तो संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास कैसे कायम रहेगा।

कांग्रेस ने मांग रखी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त तुरंत पद छोड़ें, उनके एकतरफा फैसले रद्द किए जाएं और आयोग में नए सिरे से नियुक्तियां हों। मार्च और घेराव में सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक ममता राकेश, फुरकान अहमद, लखपत बुटोला समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। इस आक्रामक तेवर से साफ है कि वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग की कार्यशैली का मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में और गरमाएगा।

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