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नैनीताल में नंदा-सुनंदा महोत्सव में शामिल हुए CM धामी, धार्मिक पर्यटन को बताया रोजगार का बड़ा जरिया

On: September 23, 2026 7:45 AM
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झील नगरी नैनीताल इन दिनों मां नंदा-सुनंदा की भक्ति में डूबी हुई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नैनीताल में आयोजित भव्य मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने मां नंदा-सुनंदा को नमन करते हुए प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने वहां उपस्थित माताओं-बहनों, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों का अभिनंदन भी किया।

आस्था और परंपरा का पावन उत्सव

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव महज एक मेला नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं का पवित्र उत्सव है। इस महोत्सव में मां नंदा-सुनंदा के स्वागत की अनूठी परंपरा के साथ लोकगीत, झोड़ा-चांचरी और ढोल-दमाऊं की थाप जैसी लोक संस्कृति की विविध विधाएं जीवंत हो उठती हैं। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी जड़ों और संस्कृति पर गर्व करता है, वही पूरे विश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल अपनी झील, ऊंचे पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन यह केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म का भी प्रमुख केंद्र है। यहां मां नैना देवी धाम, हनुमानगढ़ी और विश्वविख्यात कैंची धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। इसके साथ ही मुक्तेश्वर में भगवान महादेव का आशीर्वाद मिलता है, जो प्रकृति और अध्यात्म के संगम को नैनीताल की विशेष पहचान देता है।

“विकास भी, विरासत भी” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे देश में प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का कार्य हो रहा है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक के साथ केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हुए विकास कार्यों ने आस्था के इन केंद्रों को नई पहचान दी है। इसी भावना के साथ उत्तराखंड सरकार “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र पर चलते हुए देवभूमि को प्रगति के पथ पर आगे ले जा रही है।

उन्होंने बताया कि जिस तरह केदारखंड का विकास हुआ है, उसी तर्ज पर कुमाऊं में ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के माध्यम से पौराणिक और धार्मिक स्थलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना और प्राचीन विरासत के मूल स्वरूप की रक्षा करना है। मां नैना देवी, कैंची धाम और मुक्तेश्वर जैसे स्थलों के विकास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

धार्मिक पर्यटन से खुलेंगे रोजगार के द्वार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, मातृशक्ति को स्वरोजगार के मौके मिलेंगे और स्थानीय कला व उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा। इससे उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराएं देश-दुनिया तक पहुंचेंगी।

उन्होंने बताया कि नैनीताल जिले के समग्र विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं को सशक्त करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए घर से दूर न जाना पड़े और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

देवभूमि की अस्मिता की रक्षा सरकार की प्राथमिकता

अपने संबोधन में सीएम धामी ने कहा कि विकास के साथ देवभूमि की भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा भी सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य में भूमि संबंधी कानूनों को कड़ा किया गया है, जिसके तहत पर्वतीय जिलों में बाहरी व्यक्तियों द्वारा कृषि और उद्यान भूमि की खरीद पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।

सरकार देवभूमि की संस्कृति और संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और लैंड जिहाद व लव जिहाद जैसी गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे ऐतिहासिक कदमों से महिलाओं के कानूनी अधिकार मजबूत हुए हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है।

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