उत्तराखंड के हरिद्वार से योग गुरु स्वामी रामदेव का एक बड़ा बयान सामने आया है। हरिद्वार की श्रीजी वाटिका में आयोजित ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने देश के कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति यानी एससी/एसटी वर्ग के सम्मान के साथ-साथ ब्राह्मण समाज के सम्मान को लेकर भी उन्होंने बड़ी बात कही।
ब्राह्मणों के अपमान को भी संविधान के खिलाफ माना जाए: रामदेव
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि जिस प्रकार एससी/एसटी का अपमान करना संविधान के विरुद्ध है, उसी प्रकार ब्राह्मणों का अपमान किया जाना भी संविधान के खिलाफ माना जाना चाहिए। उन्होंने देश में बार-बार होने वाले चुनावों और आंदोलनों के दौरान होने वाले हंगामों पर भी प्रश्न उठाए और ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था को लागू करने का पुरजोर समर्थन किया। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी और विरोध करने वालों को संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति को बेहतर ढंग से समझने की नसीहत दी।
कंगना रनौत विवाद पर बिना नाम लिए निशाना
हरिद्वार में रविवार को मीडिया से बातचीत में योग गुरु स्वामी रामदेव ने भाजपा सांसद कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उनका क्या योगदान रहा है, इसलिए वह ऐसे ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। स्वामी रामदेव ने साफ किया कि वह इस विवाद को और हवा नहीं देना चाहते। दरअसल, बीते दिनों कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बाबा रामदेव पर हमला बोला था, जिसके बाद से दोनों के बीच यह विवाद लगातार गरमाया हुआ है। इसी विवाद पर रविवार को हरिद्वार में बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कंगना रनौत का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा।
‘एक देश, एक चुनाव’ से सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था
श्रीजी वाटिका में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा और विकास की गति भी तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को किसी भी प्रकार की बाधाओं का बंधक नहीं बनने देना चाहिए। स्वामी रामदेव के अनुसार देश में हर कुछ महीनों में कोई न कोई चुनाव होता रहता है, जिसकी वजह से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है क्योंकि शिक्षकों का काफी समय चुनावी ड्यूटी में चला जाता है। ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू होने से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, जैसे ही बाबा रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन किया, विपक्षी दलों के नेता इस पर भड़कते नजर आए। विपक्षी नेताओं का मानना है कि जनता का ध्यान भटकाने के लिए ही यह सब किया जा रहा है। स्वामी रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर भी बात की और कहा कि वह चाहते हैं कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश के हित से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
आंदोलनों में बच्चों के इस्तेमाल पर निशाना
योग गुरु ने देश में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के तौर-तरीकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि सड़कों पर और संसद के भीतर हंगामा और व्यवधान पैदा करके वे लोकतंत्र को बंधक बना सकते हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति इस देश के लोकतंत्र को बंधक नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, कृषि और लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं में सुधार की आवश्यकता है और सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है। हालांकि कुछ लोगों को लगता है कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शनों में पांच, सात और दस साल के बच्चों को भी शामिल किया जा रहा है और उनसे पुलिस थानों का घेराव करने, एसपी और जिला मजिस्ट्रेट का घेराव करने तथा सड़कों पर खड़े होने के लिए कहा जा रहा है। योग गुरु ने कहा कि सड़क और संसद में हंगामा कर लोकतंत्र को बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं।
वंदे मातरम पर विरोधियों को संस्कृति का पाठ
‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर भी स्वामी रामदेव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हम सभी भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में मानते हैं। यही भारत माता हमारी आस्था, हमारा ज्ञान, हमारा मंदिर हैं और हमें सुरक्षा व शक्ति देने वाली हैं। भारत माता हमारे लिए सर्वोच्च हैं और हमारी भक्ति व आकांक्षा का परम केंद्र हैं। ‘वंदे मातरम’ का विरोध करने वालों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम’ के भीतर देवियों, देवताओं, मठों या मंदिरों का उल्लेख देखते हैं, वे उनकी नजर में हमारी संस्कृत और संस्कृति से कटे हुए हैं। उन्होंने विरोध करने वालों से संस्कृत का थोड़ा और अध्ययन करने और इसके अर्थ को बेहतर ढंग से समझने को कहा। उनके अनुसार भारत माता ही हमारा ज्ञान, हमारी आस्था, हमारा मंदिर, हमारी पूजा, हमारा कर्तव्य, हमारा उद्देश्य, हमारी मंजिल, हमारा धर्म और हमारा सब कुछ हैं।









