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हर घर जल पर CM धामी सख्त: बोले — टोंटी से पानी आना ही असली कसौटी, ढिलाई पर होगी कार्रवाई

On: August 12, 2026 4:57 PM
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पीने का स्वच्छ पानी पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। सचिवालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट लहजे में निर्देश दिया कि पेयजल योजनाओं के कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर घर तक जल पहुंचाने का लक्ष्य केवल कागजों या आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सफलता की वास्तविक कसौटी यही होगी कि लोगों की टोटियों से नियमित, सुरक्षित और पर्याप्त पानी मिल रहा है या नहीं।

दरअसल, प्रदेशभर में चल रहे जल जीवन मिशन की प्रगति को लेकर हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सीएम धामी ने न केवल योजनाओं की गति की समीक्षा की, बल्कि अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही निर्धारित करने का भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, उनकी धरातल पर जाकर कठोरता से जांच कराई जाए।

लंबित कार्य तय समय में पूरे हों, डीएम रखें निगरानी

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जितनी भी पेयजल परियोजनाएं अधूरी या निर्माणाधीन हैं, उन्हें पूर्ण रूप से मिशन मोड में पूरा किया जाए। इसके लिए जिलाधिकारियों को सीधे जिम्मेदार बनाते हुए निर्देश दिए गए कि वे संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठाएं और स्थानीय समस्याओं का तत्काल निराकरण करें।

सीएम ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले के लिए पृथक लक्ष्य, समयसीमा और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यदि बिना किसी ठोस कारण के योजनाओं में विलंब पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कठोर कार्रवाई होगी। इसके साथ ही पर्वतीय जिलों में पेयजल संकट से निपटने के लिए पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, उनके पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) पर विशेष बल देने को कहा गया है।

जल जीवन मिशन की मौजूदा स्थिति क्या है?

बैठक के दौरान सामने आए आंकड़े बताते हैं कि राज्य में योजना पर तेजी से कार्य हुआ है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी शेष हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार: प्रदेश में स्वीकृत 16,555 पेयजल योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। जल जीवन मिशन के तहत राज्य ने अब तक 92.46 प्रतिशत की प्रगति हासिल की है। फिलहाल 1,015 योजनाओं पर धरातल पर कार्य चल रहा है, जिन्हें शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के कुल 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों तक नल से जल का कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। प्रदेश के 14,979 गांवों में से अब तक 9,796 गांवों में ‘हर घर जल’ का भौतिक सत्यापन पूर्ण हो चुका है।

रखरखाव की स्थायी व्यवस्था, तकनीकी खामियां तुरंत दूर हों

दरअसल, पानी का कनेक्शन देना केवल आधा कार्य है; वास्तविक चुनौती जल की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना है। सीएम धामी ने इस बिंदु पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के हर जिले में ऐसा तकनीकी तंत्र विकसित किया जाए, जो जलापूर्ति में आने वाली बाधाओं का तुरंत समाधान कर सके। पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि नल तो लग जाएं लेकिन पानी गायब न हो।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, पेयजल सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव रोहित मीणा, झरना कमठान समेत शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सीएम के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि सरकार राज्य के दूर-दराज के गांवों तक स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

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