उत्तरकाशी जिले में बीती रात आए भूकंप से हड़कंप मच गया। आधी रात को महसूस हुए तेज झटकों से लोगों की नींद टूट गई और घबराए लोग घरों से बाहर सड़कों पर आ गए। राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
कब, कहां और कितनी तीव्रता
आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह भूकंप सोमवार, 10 अगस्त की रात ठीक 01:21:34 बजे आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.2 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी के बड़कोट क्षेत्र के राजगढ़ के जंगलों में धरती से 10 किलोमीटर की गहराई में था।
जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी तहसीलों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक पुरोला, मोरी, बड़कोट और चिन्यालीसौड़ समेत कई तहसीलों में तेज झटके महसूस किए गए। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी भी तहसील से नुकसान की खबर नहीं मिली है।
तीन जिलों में 49 डेंजर जोन चिह्नित
वहीं दूसरी ओर राज्य में आपदा जोखिम को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी — इन तीन संवेदनशील जिलों में कुल 49 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं। पूर्व की आपदाओं और धराली जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सीमांत पर्वतीय जिलों में मलबा प्रवाह के खतरे का विस्तृत अध्ययन किया है।
अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इन क्षेत्रों में मलबे के तेज बहाव से भारी तबाही हो सकती है। अध्ययन के दौरान भौगोलिक स्थिति, पुराने भूस्खलन के निशान, ग्लेशियर, जल निकासी मार्गों के साथ बस्तियों और सड़कों की स्थिति का आकलन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन 49 स्थानों में से 11 को ‘हाई रिस्क’, 30 को ‘मीडियम रिस्क’ और 8 को ‘लो रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद सुमन ने बताया कि संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन स्थलों की जमीनी हकीकत की जांच कर जोखिम न्यूनीकरण हेतु विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें।









