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उत्तराखंड में अगले पांच दिन भारी बारिश की चेतावनी: कई जिलों में अलर्ट, नदियां खतरे के निशान से ऊपर

On: August 9, 2026 5:09 PM
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देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर खतरनाक रूप दिखाने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक वाली बौछारें पड़ने की संभावना है। कई जिलों के लिए बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

राजधानी देहरादून में रविवार सुबह से बादलों और धूप के बीच लुकाछिपी चलती रही। हल्की धूप निकलने पर उमस महसूस हुई, लेकिन जल्द ही आसमान बादलों से घिर गया। देहरादून में आंशिक बादलों के साथ गरज वाली हल्की से मध्यम बौछारों का अनुमान है, जबकि कुछ इलाकों में तेज बारिश के दौर भी आ सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार यहां अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश की आशंका

मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक रविवार को बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में गरज और आकाशीय बिजली के साथ बारिश के तेज दौर मुसीबत बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चम्पावत में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की पूरी संभावना है।

आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अपडेट अनुसार 10 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और चम्पावत में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी भारी बारिश की उम्मीद है। 11 अगस्त को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश असर दिखा सकती है। 12 अगस्त को देहरादून, टिहरी और बागेश्वर में, जबकि 13 अगस्त को मुख्य रूप से टिहरी, पिथौरागढ़ और चम्पावत में भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड बारिश, नदियां उफान पर

पिछले 24 घंटों में राज्य के कई भीतरी इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई है। लोहाड़खेत में 139 मिमी, शामा में 113 मिमी, सोंग में 128 मिमी, लिटी में 99 मिमी, बंगापानी में 82 मिमी और धारचूला में 43 मिमी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से राज्य की नदियां और नाले उफान पर हैं। केंद्रीय जल आयोग की रविवार सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर 627.80 मीटर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान 627 मीटर से ऊपर बह रहा है। रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी का जलस्तर 624.70 मीटर दर्ज किया गया। टोंस क्षेत्र में टोंस नदी 773 मीटर पर है, जबकि डाकपत्थर में यमुना का जलस्तर 338.90 मीटर दर्ज हुआ। धार्मिक नगरी हरिद्वार में गंगा का जलस्तर 1120.40 मीटर दर्ज किया गया है। सभी निगरानी केंद्रों और जलाशयों से डिस्चार्ज और बढ़ते जलस्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा

इन हालात को देखते हुए मौसम विभाग ने 9 और 10 अगस्त के दौरान भूस्खलन, पहाड़ों से चट्टानें गिरने, मुख्य सड़कों के बाधित होने और नदियों-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी है। कई संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड की स्थिति भी बन सकती है। प्रशासन और मौसम विभाग ने स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि भारी बारिश के इस दौर में अनावश्यक यात्रा से बचें, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।

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