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उत्तराखंड में 13 अगस्त तक भारी बारिश का पूर्वानुमान: अलकनंदा खतरे के निशान के करीब

On: August 7, 2026 2:21 PM
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उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर बेहद खतरनाक तेवर दिखाने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने राज्यभर में अगले पांच दिनों तक मौसम के बहुत ज्यादा बिगड़े रहने की चेतावनी जारी की है। विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 7 अगस्त से लेकर 13 अगस्त तक उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज बौछारों का दौर लगातार जारी रहेगा। खास तौर पर 9 से 11 अगस्त के बीच बारिश रफ्तार पकड़ेगी और कई इलाकों में इसका भयंकर रूप देखने को मिल सकता है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट घोषित कर दिया है।

तारीखवार जानें कहां कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में कुछ जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इन पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और अति तीव्र बारिश की पूरी संभावना है। इसके अलावा मैदानी क्षेत्र हरिद्वार में भी बिजली गिरने का तगड़ा खतरा बना हुआ है, जिसे लेकर प्रशासन ने लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है।

तारीखवार अलर्ट के मुताबिक 8 अगस्त को रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और बागेश्वर में, 9 अगस्त को देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और चंपावत में, जबकि 10 और 11 अगस्त को देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, चंपावत और उत्तरकाशी जिलों में झमाझम बारिश अपना कहर बरपा सकती है।

भूस्खलन और उफनती नदियों से बढ़ी चिंता

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन होने, चट्टानों के दरकने और सड़कों व राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी मलबा आने की आशंका काफी बढ़ गई है। इसके अलावा लगातार बारिश से नदी-नालों का जलस्तर तेजी से उफान पर आ सकता है, जबकि निचले इलाकों में भयंकर जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता को सख्त सलाह दी है कि वे भूस्खलन संभावित इलाकों और उफनते नदी-नालों के पास बिल्कुल न जाएं। यात्रा तभी करें जब बेहद जरूरी हो और आकाशीय बिजली कड़कने के दौरान किसी सुरक्षित जगह पर शरण लें।

राहत की बात यह है कि मौसम विभाग के फ्लैश फ्लड गाइडेंस बुलेटिन के मुताबिक फिलहाल राज्य का कोई भी क्षेत्र फ्लैश फ्लड के लिहाज से उच्च जोखिम में नहीं है, फिर भी किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

चारधाम मार्गों पर यातायात सामान्य, अलकनंदा का जलस्तर बढ़ा

बारिश के इस दौर के बावजूद चारधाम यात्रा मार्गों समेत ज्यादातर राष्ट्रीय राजमार्गों पर फिलहाल यातायात पूरी तरह सामान्य चल रहा है। ऋषिकेश-यमुनोत्री, ऋषिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश-बदरीनाथ, कर्णप्रयाग-थराली-ग्वालदम और तवाघाट-जुंजी नेशनल हाईवे पर गाड़ियां सुचारू रूप से दौड़ रही हैं। हालांकि धारचूला-तवाघाट नेशनल हाईवे कुलागाड़ के पास मलबा आने की वजह से अभी बंद है, जिसे खोलने का काम युद्धस्तर पर जारी है। वहीं ऋषिकेश-केदारनाथ हाईवे और बिजनौर-कोटद्वार मार्ग पर आए मलबे को हटाकर रास्ता साफ कर दिया गया है, जबकि मर्चूला-सतपुली राज्य मार्ग के एक हिस्से पर अभी भी आवाजाही बाधित है।

दूसरी तरफ केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है। अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी और गंगा जैसी प्रमुख नदियां चेतावनी के निशान के बेहद करीब बह रही हैं। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा का जलस्तर 62.50 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी स्तर के बहुत पास है। इसी तरह देवप्रयाग में भागीरथी का पानी भी खतरे के निशान के आसपास है, जिसके चलते नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले 24 घंटों में खानपुर में सबसे ज्यादा 127.5 मिमी, रुड़की में 108 मिमी, लक्सर में 97 मिमी और उत्तरकाशी में 66 मिमी तक की भारी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

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