देहरादून: उत्तराखंड अब केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बनता जा रहा है। चारधामों में हर साल श्रद्धालुओं की भीड़ तो लगती ही है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। प्रदेश के अन्य पौराणिक और प्रमुख मंदिरों में जिस तरह भक्त उमड़ रहे हैं, उसने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस साल की पहली छमाही (जनवरी से जून) के आंकड़े बता रहे हैं कि उत्तराखंड आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम से लेकर रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर तक श्रद्धालुओं की संख्या में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज हुई है। यह बदलाव महज संयोग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं के विकास और बेहतर संपर्क का परिणाम माना जा रहा है।
कहां कितने बढ़े श्रद्धालु
पर्यटन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल के शुरुआती छह महीनों में अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में 1,74,119 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह संख्या सिर्फ 67,875 थी। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल माने जाने वाले त्रियुगीनारायण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर 3,40,385 हो गई, जो पिछले साल 1,36,120 थी। चंपावत के पूर्णागिरि धाम में इस साल जून तक 20,91,788 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि बीते साल यह आंकड़ा 14,35,290 था। श्रीनगर के पास धारी देवी मंदिर में भी भक्तों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है — इस साल यहां 5,42,626 श्रद्धालु पहुंचे। कैंची धाम में तो आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा — छह महीनों में 24 लाख से अधिक भक्तों ने बाबा नीब करौरी के दर्शन किए, जिनमें अकेले जून में 8.66 लाख श्रद्धालु पहुंचे।
यमुनोत्री और बद्रीनाथ ने रचा इतिहास
चारधाम यात्रा की बात करें तो शुरुआती 105 दिनों में ही 45 लाख 84 हजार से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच चुके हैं। सबसे कठिन मानी जाने वाली यमुनोत्री धाम की यात्रा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए — दो अगस्त तक 6,54,958 यात्री मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास की अब तक की सर्वाधिक संख्या है। बद्रीनाथ धाम में भी यात्रा के शुरुआती 100 दिनों में 15 लाख 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीश नवाया, जो पिछले साल से 3 लाख 11 हजार अधिक है। पिथौरागढ़ के आदि कैलाश धाम में सिर्फ दो महीनों (मई और जून) में 52,441 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यहां आने वाले यात्रियों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
मानसखंड मंदिरमाला मिशन से विकास की रफ्तार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का संकल्प लिया है। केदारखंड की तर्ज पर कुमाऊं में ‘मानसखंड मंदिरमाला मिशन’ पर तेजी से काम हो रहा है। पौराणिक मंदिरों के सौंदर्यीकरण, तीर्थस्थलों तक बेहतर सड़कों और परिवहन सेवाओं के विस्तार से दूर-दराज के मंदिरों तक पहुंच आसान हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप हम उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस संकल्प को साकार करने के लिए प्राचीन मंदिरों का विकास और तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।” स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि ऋषिकेश के पास मुनिकीरेती, तपोवन, शिवपुरी और सुरकंडा देवी जैसे स्थलों पर बढ़ती आवाजाही से स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी बल मिला है।









