देहरादून: देवभूमि की बेटियां अब खेल के मैदान में उतरने के साथ अपनी मुक्केबाजी से दुनिया में तिरंगा फहरा रही हैं। पिथौरागढ़ की तीन होनहार मुक्केबाजों — निकिता चंद, काजल फर्स्वाण और आरती धारियाल — ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास पर तीनों महिला खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें उनकी उपलब्धि पर सम्मानित किया।
यह मुलाकात महज औपचारिकता नहीं थी, बल्कि राज्य के खेल परिदृश्य में बेटियों के बढ़ते वर्चस्व पर मुहर जैसी थी। मुख्यमंत्री ने पदक विजेता खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के साथ उनके कोचों — बृजेंद्र मल और ललित कुँवर — को भी बधाई दी। इस दौरान खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
जकार्ता से रोमानिया तक धाक
इंडोनेशिया के जकार्ता में 3 से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित अंडर-23 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में निकिता चंद और काजल फर्स्वाण ने प्रतिभा का लोहा मनवाया। 60 किलोग्राम भार वर्ग में निकिता चंद ने फुर्तीले और सटीक पंचों से सिल्वर मेडल जीता, जबकि 65 किलोग्राम भार वर्ग में काजल फर्स्वाण ने भी देश की झोली में रजत पदक डाला। वहीं रोमानिया में 12 से 16 जुलाई 2026 के बीच हुई प्रतिष्ठित ‘गोल्ड बेल्ट बॉक्सिंग प्रतियोगिता’ में आरती धारियाल ने 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
संघर्ष से राष्ट्रीय कैंप तक का सफर
तीनों खिलाड़ियों की कहानी उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों से शुरू होती है। पिथौरागढ़ के बड़ालू गांव की निकिता चंद कोई नया नाम नहीं हैं — इससे पहले वे 2021, 2022 और 2023 में भी एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी हैं। फिलहाल वे कोच बृजेंद्र मल और भास्कर भट्ट की देखरेख में अपनी कला निखार रही हैं। मुनस्यारी के भदेली गांव की काजल फर्स्वाण का सफर भी मिसाल है — खेल विभाग के महिला आवासीय छात्रावास से शुरू हुआ उनका सफर रोहतक के एनबीए और अब पटियाला के नेशनल कैंप तक पहुंचा है। काजल के खाते में पहले से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक हैं। गौड़ीहाट गांव की आरती धारियाल ने स्मॉल खेलो इंडिया सेंटर से शुरुआत कर पटियाला स्थित राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप में जगह बनाई है।
खिलाड़ियों को हरसंभव मदद का भरोसा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बेटियां खेलों में लगातार नए कीर्तिमान रच रही हैं। सीएम के अनुसार, “निकिता, काजल और आरती की सफलता साबित करती है कि देवभूमि की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना कड़ी मेहनत, सही कोचिंग और परिवार के समर्थन का परिणाम होता है।” मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार खेल ढांचे को मजबूत करने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को हर जरूरी संसाधन देने के लिए निरंतर काम कर रही है, ताकि गांव-कस्बों के खिलाड़ियों को ऐसा माहौल मिले जिससे वे देश का नाम रोशन कर सकें।









