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पिता का साया उठा तो रुकी पढ़ाई, अब DM सविन बंसल ने इन 10 बेटियों के लिए जो किया वो है मिसाल

By: Sansar Live Team

On: Saturday, March 21, 2026 1:24 PM

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देहरादून। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल के तहत इन 10 बालिकाओं की फीस और पढ़ाई के खर्च के लिए 2.03 लाख रुपये के चेक वितरित किए गए। नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट के जरिए अब तक जिले की 136 से अधिक असहाय और जरूरतमंद बेटियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रशासन का लक्ष्य उन ‘गैप्स’ को भरना है, जहां सरकारी योजनाओं का लाभ तकनीकी कारणों से नहीं पहुंच पाता।

टूटने नहीं देंगे उम्मीद: जब पिता का साया हटा तो प्रशासन बना सहारा

इस कार्यक्रम में जिन बेटियों की कहानी सामने आई, वे किसी का भी दिल पसीजने के लिए काफी थीं। बनियावाला की आराध्या सिंह हों या झंडाबाजार की अनुष्का शर्मा, इन सबके सिर से पिता का साया उठने के बाद पढ़ाई का सपना धुंधलाने लगा था। अनुष्का की मां कपड़े की दुकान में काम करके घर चलाती हैं, लेकिन स्कूल की फीस भरना उनके लिए पहाड़ जैसा बोझ बन गया था।

वहीं, सुद्धोवाला की मान्यता ठाकुर की कहानी और भी चुनौतीपूर्ण है। मान्यता के पिता लापता हैं, घर में पांच भाई-बहन हैं और बड़ी बहन दिव्यांग है। 10वीं की छात्रा मान्यता के पास पढ़ाई छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था, लेकिन प्रशासन ने वक्त रहते उनका हाथ थाम लिया। बीकॉम की छात्रा हर्षिता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, पिता की मृत्यु के बाद उनकी कॉलेज की पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा था, जिसे अब दूर कर दिया गया है।

नशा और बीमारी ने छीनी पढ़ाई, लेकिन प्रशासन बना ‘अभिभावक’

समाज की कड़वी सच्चाई भी इन कहानियों में झलकती है। एमडीडीए कॉलोनी की नियति वासुदेव की शिक्षा इसलिए बाधित हो गई क्योंकि उनके पिता नशे की लत के शिकार होकर नशामुक्ति केंद्र में भर्ती हैं। घर की माली हालत इतनी खराब हुई कि कक्षा 6 की पढ़ाई पर ब्रेक लग गया। इसी तरह नंदनी और नंदिता की मां दूसरों के घरों में साफ-सफाई कर गुजारा करती हैं और खुद दिल की मरीज हैं। 9 महीने की फीस जमा न होने के कारण इन बच्चियों का स्कूल जाना बंद हो गया था।

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने भी कई परिवारों के सपनों को तोड़ा है। हर्रावाला की त्रिशा की माता का निधन कैंसर से हो गया और इलाज में सारा पैसा खर्च होने के कारण पिता स्कूल की फीस देने में असमर्थ हो गए। प्रशासन ने इन सभी मामलों में संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत आर्थिक सहायता मुहैया कराई है।

136 से अधिक बेटियों के सपनों को मिले पंख

जिलाधिकारी सविन बंसल ने टीम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा, “यदि हम किसी एक बेटी को सशक्त करते हैं, तो पूरा कुल सशक्त होता है। नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि इन बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।” मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने भी बालिकाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि वे केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें, प्रशासन हर कदम पर उनके साथ खड़ा है।

नगर पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार ने भी इस पहल को सराहा और भरोसा दिलाया कि पुलिस प्रशासन भी इन बेटियों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों की आंखों में खुशी के आंसू थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए इस योजना को समाज के लिए एक प्रेरणा बताया।

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