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देहरादून से वेरावल के लिए विशेष ट्रेन रवाना, सीएम धामी ने कहा- सोमनाथ भारत के स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक

By: Sansar Live Team

On: Monday, July 13, 2026 2:35 PM

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देहरादून: उत्तराखंड में देवभूमि की आध्यात्मिक चेतना को देश के दूसरे कोनों से जोड़ने की एक अनूठी मुहिम शुरू हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून के हर्रावाला रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के मौके पर वेरावल (सोमनाथ) के लिए एक विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस छह दिवसीय विशेष तीर्थ यात्रा में उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों से करीब 700 श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। ट्रेन को रवाना करते वक्त पूरा स्टेशन जय सोमनाथ और जय केदार के जयकारों से गूंज उठा।

दरअसल, इस यात्रा को सिर्फ एक धार्मिक फेरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने खुद इसे राष्ट्र के स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक बड़ा जरिया बताया है। इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसमें समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिला है। सफर पर निकलने वाले 700 लोगों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज के लोग और आम नागरिक शामिल हैं। संस्कृति विभाग की इस पहल की तारीफ करते हुए सीएम धामी ने यात्रियों के सुरक्षित सफर के लिए बाबा केदार और भगवान सोमनाथ से प्रार्थना की।

सोमनाथ मंदिर: अटूट आस्था और पुनरुत्थान की कहानी

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम भगवान सोमनाथ का मंदिर भारत की अटूट आस्था और पुनरुत्थान का सबसे बड़ा प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि इस मंदिर ने कितने ही आक्रमण और विध्वंस झेले, लेकिन हर बार यह और भव्य होकर खड़ा हुआ। सोमनाथ का अस्तित्व पूरी दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत को कोई मिटा नहीं सकता और वह हर चुनौती के बाद ज्यादा ताकत के साथ उठ खड़ा होता है।

सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश में एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर चल रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से लेकर सोमनाथ, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकाल और बद्रीनाथ धाम तक, हर तरफ आस्था के केंद्रों का कायाकल्प हो रहा है। सरकार का मानना है कि ये मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सभ्यता और आध्यात्मिक परंपरा की जीवनरेखा हैं, जिन्हें लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया था।

उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेकर सूबे को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के काम में जुटी है। इसके लिए केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों को संवारने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसके अलावा हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ का पुनरुद्धार किया जा रहा है, जबकि हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी बड़ी योजनाओं पर सरकार का विशेष फोकस है। शिक्षा और शोध के मोर्चे पर भी कदम बढ़ाते हुए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की शुरुआत की गई है।

देवभूमि के मूल स्वरूप से कोई समझौता नहीं: सीएम

भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कड़े फैसलों को भी जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि देवभूमि के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप को बचाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी वजह से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 13 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन को भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह सिर्फ जमीन खाली कराने का काम नहीं है, बल्कि देवभूमि की पवित्रता की रक्षा की लड़ाई है।

इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी, जिसके तहत 250 से ज्यादा अवैध मदरसों को सील कर ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है।

चलते-चलते मुख्यमंत्री ने ट्रेन में सवार हो रहे सभी श्रद्धालुओं से एक भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि यात्रा पर जा रहे सभी लोग देश के जिस भी कोने में जाएं, वहां उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, ऊंचे संस्कार और ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना का प्रदर्शन करें। उन्होंने यात्रियों से कहा कि वे केवल दर्शन करने नहीं जा रहे, बल्कि बाहरी राज्य में उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना के ब्रांड एंबेसडर बनकर जा रहे हैं। इस मौके पर स्थानीय विधायक बृज भूषण गैरोला, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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