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उत्तराखंड के पैदल चलने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दिया सड़क पर पहला अधिकार

By: Sansar Live Team

On: Tuesday, April 21, 2026 8:57 AM

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देहरादून, 21 अप्रैल 2026: उत्तराखंड में सड़कों पर सफर करने का अंदाज अब पूरी तरह बदलने वाला है। अगर आप भी देवभूमि की सड़कों पर पैदल चलते हैं या तांगा-बैलगाड़ी जैसे साधनों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। प्रदेश सरकार पैदल चलने वालों और गैर-यांत्रिक वाहनों की सुरक्षा के लिए एक नई और ‘ठोस सुरक्षा नीति’ लाने जा रही है। परिवहन मुख्यालय ने इस नीति का खाका तैयार कर शासन को भेज दिया है, जिसमें न केवल राहगीरों को सड़क पर पहला हक दिया गया है, बल्कि नियमों को ताक पर रखने वालों के लिए कड़े जुर्माने की तैयारी भी की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक्शन में सरकार

राज्य सरकार का यह कदम कोई सामान्य बदलाव नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों का हिस्सा है। पिछले साल ‘राजशेखर बनाम केंद्र सरकार’ मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को आदेश दिया था कि वे पैदल यात्रियों और पारंपरिक वाहनों (जैसे हाथगाड़ी या बैलगाड़ी) की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें। इसी आदेश का पालन करते हुए अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। वर्तमान में शासन स्तर पर इस प्रस्ताव की बारीकी से जांच की जा रही है, जिसके बाद इसे अंतिम मुहर के लिए कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

जेब्रा क्रॉसिंग पर अब आपकी चलेगी ‘हुकूमत’

इस नई नियमावली की सबसे बड़ी बात यह है कि अब जेब्रा क्रॉसिंग पर पैदल चलने वालों को ‘किंग’ माना जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई राहगीर जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार कर रहा है, तो मोटर वाहन चलाने वालों को अपनी गाड़ी ‘स्टॉप लाइन’ से पहले हर हाल में रोकनी होगी। यह नियम सिर्फ कार या बाइक वालों पर ही नहीं, बल्कि तांगा और हाथगाड़ी खींचने वालों पर भी लागू होगा। यानी अब सड़क पार करने का पहला अधिकार आपका होगा और वाहन चालकों को आपको रास्ता देना ही पड़ेगा।

हाईवे पर पैदल चलने की मनाही और सुरक्षा का नया ढांचा

तेज रफ्तार सड़कों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए सरकार नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर पैदल चलने और गैर-यांत्रिक वाहनों के चलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा सकती है। लेकिन राहगीरों की सुविधा का भी ख्याल रखा गया है। आबादी वाले इलाकों में हर एक से तीन किलोमीटर के बीच अंडरपास या फुटओवर ब्रिज (FOB) बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, सड़कों के किनारे फुटपाथ बनाना अब अनिवार्य होगा और जगह-जगह साइन बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि किसी को कोई भ्रम न रहे।

फुटपाथ न होने पर चलना होगा ‘उल्टा’

अक्सर देखा जाता है कि फुटपाथ न होने पर लोग सड़क के किनारे चलते हैं और पीछे से आ रहे वाहन का अंदाजा नहीं लगा पाते। इस समस्या को सुलझाने के लिए नीति में एक अनोखा बदलाव प्रस्तावित है। जिन सड़कों पर फुटपाथ नहीं होगा, वहां पैदल यात्रियों को यातायात की विपरीत दिशा (Opposite direction) में चलना होगा। इससे राहगीर सामने से आने वाले वाहनों को देख सकेंगे और समय रहते सुरक्षित हो सकेंगे। परिवहन विभाग का लक्ष्य इन नियमों के जरिए सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम से कम करना है।

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