उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनकी सरकार पशुपालन और मत्स्य पालन को सबसे बड़ा हथियार मानती है। गुरुवार को देहरादून के निरंजनपुर में राज्यभर से जुटे पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों के साथ सीधा संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने मत्स्य पालन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आधुनिक ‘रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि पशुपालन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि पहाड़ की जीवनशैली की रीढ़ है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को दोहराते हुए कहा कि जब तक हमारा गांव और किसान आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक आत्मनिर्भरता का सपना अधूरा है।
स्वरोजगार की नई राह: गोट वैली और ट्राउट फार्मिंग
धामी सरकार अब राज्य को ‘हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन’ और ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। दरअसल, उत्तराखंड का मत्स्य सेक्टर फिलहाल 9 प्रतिशत से अधिक की विकास दर से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्राउट फार्मिंग स्वरोजगार का एक बड़ा जरिया बनकर उभरी है, जिसके लिए सरकार ने 170 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू की है।
उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में नई ट्राउट हैचरी की स्थापना की जा रही है। पशुपालन के क्षेत्र में भी पिछले चार वर्षों के भीतर करीब साढ़े 11 हजार लोगों को स्वरोजगार मिला है। ‘मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन’ के तहत लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक का भारी-भरकम ऋण अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है, जिससे युवाओं और महिलाओं के लिए घर पर ही रोजगार के रास्ते खुले हैं।
पशुओं के लिए ‘मोबाइल यूनिट’ और बद्री घी का वैश्विक जलवा
पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार अब पहले से ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य के 60 विकासखंडों में ‘मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स’ (चलते-फिरते अस्पताल) चलाए जा रहे हैं। साथ ही, हर जिले में मॉडल पशु चिकित्सालय बनाए जा रहे हैं।
पशुपालकों के लिए एक और गर्व की बात यह रही कि उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘बद्री गाय’ के घी को देश का पहला जीआई टैग (GI Tag) मिल चुका है। इससे ‘बद्री घी’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिली है, जिससे स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को अब अपने उत्पाद के बेहतर दाम मिल पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले चार सालों में राज्य के दुग्ध उत्पादन में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
संवाद में दिखी सफलता की कहानियां
कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार के पशुपालक हरिकिशन लखेड़ा ने मुख्यमंत्री को अपनी सफलता की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि ‘ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म’ योजना के तहत 50 गायें खरीदकर वे आज हर महीने 1 लाख 15 हजार रुपये की शुद्ध आय कमा रहे हैं। वहीं डोईवाला के अमित सिंह ने पशु चारे के क्षेत्र में एफपीओ (FPO) बनाकर 10 करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर हासिल किया है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को 2030 तक ‘खुरपका-मुंहपका’ रोग मुक्त राज्य बनाने के लिए चुना है, जो पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी इस मौके पर सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज राज्य के सभी दुग्ध संघ मुनाफे में हैं और ‘गोट वैली प्रोजेक्ट’ जैसे नवाचारों से हजारों परिवारों की तकदीर बदल रही है।
