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14 अगस्त 1947 की वो खौफनाक रात, हरिद्वार में विभाजन विभीषिका पर भावुक हुए मुख्यमंत्री धामी

By: Sansar Live Team

On: Friday, August 14, 2026 1:35 PM

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हरिद्वार के प्रेम नगर आश्रम में बुधवार को जब भारत विभाजन के उस दर्दनाक दौर की यादें ताजा की गईं, तो माहौल भावुक हो उठा। मौका था उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम का, जहां मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1947 के बंटवारे में जान गंवाने वाले लाखों बेगुनाहों और विस्थापित परिवारों के बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि साल 1947 की त्रासदी केवल जमीन या भौगोलिक सीमाओं के बंटवारे तक सीमित नहीं थी। असल में, यह सदियों से साथ रह रहे करोड़ों लोगों की साझा संस्कृति, पहचान और भावनाओं का क्रूर विस्थापन था। रातों-रात लोग बेगाने हो गए और अनगिनत परिवारों को अपनी ही मिट्टी छोड़कर पलायन का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस गहरे जख्म और इतिहास के सबक को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस और राष्ट्रीय एकता का संदेश

सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने की पहल को एक युगांतकारी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन को याद करने का असल मकसद पीड़ित परिवारों के संघर्ष को सम्मान देना और आने वाली पीढ़ियों को देश की एकता, अखंडता व सामाजिक ताने-बाने की अहमियत समझाना है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि आज का भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दोबारा जुड़ रहा है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम का कायाकल्प, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर जैसे कदमों ने देश के आत्मसम्मान को नई ऊंचाई दी है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति, सीएए, तीन तलाक पर रोक और 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने जैसे फैसलों से देश में भरोसा मजबूत हुआ है।

देवभूमि की अस्मिता, विकास और कुंभ की तैयारियां

उत्तराखंड के विकास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है। दूर-दराज के गांवों से लेकर प्रमुख शहरों तक स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

आगामी कुंभ मेले का जिक्र करते हुए सीएम ने भरोसा जताया कि इस बार का आयोजन ऐतिहासिक, भव्य और पूरी तरह सुरक्षित होगा। सरकार परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ आगे बढ़ रही है।

‘रेडक्लिफ को भारत की समझ ही नहीं थी’: पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत

कार्यक्रम में मौजूद हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बंटवारे के ऐतिहासिक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त 1947 तक देश अखंड था, लेकिन आधी रात के बाद लकीरें खींच दी गईं। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि बंटवारा हो चुका था, मगर सीमाएं स्पष्ट नहीं थीं।

उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि सीमा तय करने का जिम्मा अंग्रेज अफसर सर सिरिल रेडक्लिफ को दिया गया, जिसे भारत की सामाजिक संरचना और संस्कृति की कोई बुनियादी समझ ही नहीं थी। ऐसे संवेदनशील फैसले ने लाखों जिंदगियों को अंधेरे में धकेल दिया।

बुजुर्गों का सम्मान और रक्तदान शिविर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वहां लगाई गई विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का अवलोकन किया और तस्वीरों के जरिए उस दौर की त्रासदी को देखा। इसके बाद उन्होंने परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर का जायजा लेते हुए रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र बांटे। सीएम ने विभिन्न जिलों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के वरिष्ठ बुजुर्गों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक प्रदीप बत्रा, आदेश चौहान, सविता कपूर, हरिद्वार मेयर किरण जैसल, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पंजाबी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष करण मल्होत्रा, महामंत्री राजकुमार फुटेला सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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