देवभूमि उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। राज्य ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास’ (ULLAS) नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निर्धारित सभी मानकों को पूरा कर लिया है। अब उत्तराखंड आधिकारिक तौर पर देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को राज्य के विकास का एक बड़ा ‘मील का पत्थर’ करार दिया है।
कैसे हासिल किया यह गौरव?
उत्तराखंड ने अपनी साक्षरता दर को 98.7 प्रतिशत तक पहुँचा दिया है। इस मुकाम को हासिल करने के लिए सबसे पहले ‘उल्लास’ कार्यक्रम के जरिए पूरे राज्य में सर्वे किया गया। इसमें 7 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या का आंकलन किया गया, जो करीब 1 करोड़ 23 लाख 46 हजार के आसपास थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी आबादी में केवल 1 लाख 31 हजार 986 लोग ही निरक्षर पाए गए। साक्षरता की इस गणना में 6 वर्ष तक के बच्चों को शामिल नहीं किया गया था। अब इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद देश का छठा सबसे साक्षर राज्य बन गया है।
साक्षरता के बाद अब अगली तैयारी
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसे हर उत्तराखंडी के लिए गर्व का पल बताया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और जीवनभर सीखने वाली शिक्षा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सरकार अब सिर्फ किताबी साक्षरता तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। राज्य में अब डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता और जीवन को आसान बनाने वाले कौशलों (Skills) को हर घर तक पहुंचाने का अभियान तेज किया जाएगा। यह सामूहिक प्रयास निश्चित रूप से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।
