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कैंसर पीड़ित विधवा मां की रोते-रोते गुहार सुन पिघला जिलाधिकारी का दिल, फिर जो हुआ उसे देख आप भी करेंगे सलाम

By: Sansar Live Team

On: Monday, June 1, 2026 5:51 PM

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देहरादून, 22 मई 2026 (सूवि): कहते हैं कि जब मुसीबत आती है, तो चारों तरफ अंधेरा छा जाता है। लेकिन अगर शासन और प्रशासन का दिल धड़कने वाला हो, तो हर अंधेरी रात के बाद एक नई सुबह जरूर आती है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और देहरादून के जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन आजकल कुछ ऐसा ही कर रहा है। प्रशासन केवल सरकारी दफ्तरों की फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह असहाय और संकटग्रस्त परिवारों के आंसू पोंछकर उनकी जिंदगी सच में बदल रहा है। इलाज, पढ़ाई, रोजगार से लेकर बैंक कर्ज माफी तक, प्रशासन ने सैकड़ों मामलों को मानवीय नजरिए से सुलझाकर जरूरतमंदों को जीने का एक नया सहारा दिया है।

जब डीएम के सामने रो पड़ी डोईवाला की सुनीता

मुसीबत का पहाड़ कैसा होता है, यह डोईवाला की रहने वाली सुनीता कलवार से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। सुनीता एक विधवा महिला हैं और इस दुख के बीच उन्हें पता चला कि वह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में हैं। एक तो पति का साथ छूटा, ऊपर से जानलेवा बीमारी और जेब पूरी तरह खाली। सुनीता के सामने खुद के इलाज के साथ-साथ अपने दो मासूम बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो वह अपनी व्यथा लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल के पास पहुंचीं। उन्होंने रोते हुए गुहार लगाई कि उनकी बीमारी की वजह से बच्चों की पढ़ाई न छूटे, इसलिए बच्चों की फीस माफ कराई जाए और थोड़ी आर्थिक मदद दी जाए।

जिलाधिकारी का तुरंत एक्शन और 50 हजार की मदद

सुनीता की इस बेहद दर्दभरी दास्तान को सुनकर जिलाधिकारी सविन बंसल बेहद भावुक हो गए। उन्होंने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए बिना एक पल गंवाए तुरंत बड़े निर्देश जारी कर दिए। जिलाधिकारी के आदेश पर जिला प्रशासन ने रायफल क्लब फंड से सुनीता कलवार को तत्काल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर कर उनके हाथ में सौंप दी। यह रकम सुनीता के लिए उस समय किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं थी।

मासूम बच्चों के भविष्य को मिला ‘नंदा-सुनंदा’ का वरदान

प्रशासन सुनीता को केवल पैसे देकर ही पीछे नहीं हटा, बल्कि उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाई। सुनीता के बेटे का स्कूल में दाखिला पक्का कराया गया ताकि उसकी पढ़ाई न रुके। वहीं, पैसों की तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ चुकी उनकी बेटी की शिक्षा को जिला प्रशासन की एक बेहद खास और महत्वाकांक्षी मुहिम ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के जरिए दोबारा शुरू कराया गया। प्रशासन के इस कदम ने सुनीता के दोनों बच्चों के अंधेरे में डूब रहे भविष्य को एक नई और सुरक्षित दिशा दे दी है।

कैंसर के ऑपरेशन के बाद भी जारी है जिंदगी की जंग

आपको बता दें कि सुनीता कलवार का 11 जुलाई 2024 को जौलीग्रांट के एक अस्पताल में कैंसर का बड़ा ऑपरेशन हुआ था। तब से लेकर आज तक उनका इलाज लगातार चल रहा है। इस लंबे इलाज के दौरान आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट चुके इस परिवार को देहरादून जिला प्रशासन ने न सिर्फ पैसों की मदद दी, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि वे समाज में अकेले नहीं हैं। प्रशासन लगातार उनके इलाज और परिवार की देखरेख के लिए हर संभव तालमेल बिठाकर काम कर रहा है।

तकदीर के मारों का असली मसीहा बना जिला प्रशासन

यह कोई पहला मामला नहीं है जब जिला प्रशासन ने किसी की इस तरह मदद की हो। पिछले कुछ सालों में प्रशासन ने ऐसे कई मजबूर परिवारों को लाखों रुपये की सीधी आर्थिक मदद पहुंचाई है। बिजली और पानी के भारी-भरकम पुराने बिलों को माफ कराने, बैंक के कर्ज से राहत दिलाने, इलाज के लिए पैसे देने और रायफल क्लब फंड से मदद करने जैसे ढेरों काम करके कई बिखरते परिवारों को संभाला गया है। इसके अलावा, ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के दम पर आज सैकड़ों गरीब और बेसहारा बच्चियों की छूटी हुई पढ़ाई को दोबारा शुरू कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। देहरादून जिला प्रशासन की यह अनोखी और संवेदनशील कार्यशैली आज पूरे सूबे में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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