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उत्तराखंड में कांग्रेस का ‘प्लान जून’: हरीश रावत ने अल्मोड़ा में डाला डेरा, राहुल गांधी के दौरे से पहले बड़ी हलचल

By: Sansar Live Team

On: Wednesday, May 27, 2026 11:48 AM

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उत्तराखंड की सियासत में पारा चढ़ने लगा है और आने वाला जून का महीना बेहद सियासी हलचल से भरा रहने वाला है। राज्य में आगामी चुनावी रण को फतह करने के लिए दोनों ही प्रमुख दलों, भाजपा और कांग्रेस, ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक बैठकों और दौरों का दौर शुरू होने जा रहा है। एक तरफ जहां भाजपा के कद्दावर नेता और प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन देहरादून में तीन दिनों तक मैराथन बैठकें कर संगठन की नब्ज टटोलेंगे, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कुमाऊं और गढ़वाल के मैदान में उतरकर पार्टी के अभियान का शंखनाद करेंगे।

असल में, उत्तराखंड चुनाव की तैयारियों को धार देने के लिए दोनों ही दलों के शीर्ष नेतृत्व ने इस बार जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालने का मन बना लिया है। उत्तराखंड कांग्रेस और भाजपा, दोनों के लिए ही यह हफ्ता बेहद निर्णायक साबित होने जा रहा है क्योंकि इसके बाद ही राज्य की भावी राजनीतिक दिशा तय होगी। जहां भाजपा सत्ता विरोधी लहर को थामने और संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस पिछले कुछ समय से चल रहे अपने आंतरिक गतिरोध को भुलाकर नए सिरे से जनता के बीच जाने की तैयारी में है।

देहरादून में नितिन नवीन का तीन दिवसीय मैराथन मंथन

भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन गुरुवार, 28 मई को देहरादून पहुंच रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर उत्तराखंड भाजपा में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लेकर देहरादून तक करीब 25 अलग-अलग जगहों पर उनके भव्य स्वागत की तैयारियां की गई हैं। भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार की मानें तो यह दौरा महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि पूरी तरह से संगठनात्मक मजबूती और उत्तराखंड चुनाव की तैयारियों की समीक्षा पर केंद्रित रहने वाला है।

तय कार्यक्रम के मुताबिक, दौरे के पहले ही दिन नितिन नवीन भाजपा की कोर कमेटी के साथ बेहद अहम बैठक करेंगे। इसके अगले दिन यानी दूसरे दिन वे मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के साथ आमने-सामने बैठेंगे, जहां सरकार के कामकाज और जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का सीधा फीडबैक लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि बूथ स्तर से लेकर प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी कार्यक्रमों का एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका जा सके।

राहुल गांधी का कुमाऊं और गढ़वाल दौरा, पौड़ी में सैनिकों से संवाद

दूसरी तरफ, कांग्रेस भी राज्य में बैकफुट से निकलकर आक्रामक मोड में आने की तैयारी कर चुकी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने साफ किया है कि राहुल गांधी आगामी 4 और 5 जून को उत्तराखंड चुनाव की तैयारियों को धार देने के लिए राज्य के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। राहुल का यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि वे कुमाऊं और गढ़वाल दोनों ही क्षेत्रों को साधने की कोशिश करेंगे।

कार्यक्रम के अनुसार, 4 जून को सुबह 11:30 बजे राहुल गांधी अल्मोड़ा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए चुनावी बिगुल फूंकेंगे। इसी दिन दोपहर बाद करीब 3:30 बजे वे पौड़ी पहुंचेंगे, जहां वे पूर्व सैनिकों के साथ संवाद कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। उत्तराखंड में सैनिकों और उनके परिवारों का एक बड़ा वोट बैंक है, जिसे साधने की जिम्मेदारी राहुल खुद संभाल रहे हैं। इसके अगले दिन, यानी 5 जून की सुबह वे देहरादून में प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों, पूर्व विधायकों और प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर राज्य के स्थानीय मुद्दों पर मंथन करेंगे। राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही अल्मोड़ा में डेरा डाल चुके हैं।

कांग्रेस में ‘घर वापसी’ का दूसरा चरण और हरीश रावत की नाराजगी का असर

उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर मार्च महीने में मचे घमासान के बाद जिस ज्वाइनिंग अभियान को रोक दिया गया था, उसे अब जून के पहले हफ्ते से दोबारा शुरू किया जा रहा है। हालांकि, इस बार कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। गणेश गोदियाल ने स्पष्ट कहा कि इस बार किसी भी नेता की एंट्री स्थानीय समीकरणों और कार्यकर्ताओं की पूरी सहमति के बाद ही होगी। पहली सूची के 12 नेताओं के अलावा 5 और नए नाम केंद्रीय आलाकमान को भेजे जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि रामनगर के संजय नेगी को इस दूसरे चरण में पार्टी की सदस्यता दिलाई जा सकती है।

दरअसल, पिछली बार जब थोक के भाव में ज्वाइनिंग हुई थी, तो अपनी उपेक्षा से नाराज होकर वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 15 दिनों के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। कांग्रेस आलाकमान इस बार हरीश रावत को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता, यही वजह है कि इस बार स्थानीय संगठन की राय को सर्वोपरि रखा गया है।

निश्चित तौर पर, जून के पहले हफ्ते में होने वाली ये दोनों बड़ी सियासी हलचलें उत्तराखंड की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आएंगी। अब देखना यह होगा कि भाजपा का यह संगठनात्मक मंथन और राहुल गांधी का यह जनसंवाद आने वाले चुनावों में जनता के दिल को कितना छू पाता है।

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