आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ रील देखने, लाइक बटोरने या मनोरंजन का साधन भर नहीं रह गया है, बल्कि यह नैरेटिव सेट करने और समाज की दिशा तय करने का सबसे बड़ा डिजिटल हथियार बन चुका है। इसी ताकत और प्रभाव को गहराई से समझते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami Haldwani) ने प्रदेश के युवाओं से सीधा संवाद किया है। हल्द्वानी में आयोजित ‘सोशल मीडिया मंथन विथ सीएम धामी’ कार्यक्रम में उन्होंने डिजिटल क्रिएटर्स, इंफ्लुएंसर्स और वॉलेंटियर्स से साफ शब्दों में कहा कि इंटरनेट की इस तेज रफ्तार दुनिया में फेक नैरेटिव और भ्रामक जानकारियों से पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है।
दरअसल, सीएम धामी का यह स्पष्ट संदेश था कि देवभूमि का युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सिर्फ एक मूक दर्शक बनकर न रहे, बल्कि वह आगे आए और प्रदेश का ‘डिजिटल ब्रांड एम्बेसडर’ बनकर उभरे। कार्यक्रम के दौरान भारी संख्या में पहुंचे युवाओं ने रोजगार, देवभूमि की संस्कृति, राष्ट्रवाद और राज्य के विकास से जुड़े कई सीधे सवाल पूछे। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने भी बिना किसी लाग-लपेट के पूरे आत्मविश्वास, स्पष्टता और आत्मीयता के साथ इन सभी सवालों के जवाब दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि डिजिटल इंडिया के इस युग में उत्तराखंड की अनूठी संस्कृति और सकारात्मक छवि को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब राज्य के युवाओं के ही मजबूत कंधों पर है।

देवभूमि की संस्कृति और ‘CM Dhami Haldwani’ का विजन
असल में, मुख्यमंत्री धामी यह अच्छी तरह जानते हैं कि युवाओं की उंगलियों में दुनिया बदलने की ताकत है। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का भी जिक्र किया, जिन्होंने सोशल मीडिया को महज संवाद नहीं, बल्कि जनसंवाद का एक बेहद सशक्त माध्यम बनाया है और युवाओं को सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ा है। इसी तर्ज पर धामी ने आह्वान किया कि समाज को बांटने वाली ताकतों और अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया के जरिए ही करारा जवाब दिया जाना चाहिए। इंटरनेट पर सकारात्मकता, सत्य और तथ्यपरक जानकारी शेयर करना आज के दौर में हर जिम्मेदार युवा की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
ऐतिहासिक फैसलों से संवर रहा प्रदेश का भविष्य
जब बात उत्तराखंड के समग्र विकास की आई, तो सीएम ने अपनी सरकार के उन कड़े और ऐतिहासिक फैसलों का भी खुलकर जिक्र किया, जिनकी चर्चा इन दिनों पूरे देश में हो रही है। उन्होंने मंच से याद दिलाया कि राज्य सरकार ने सिर्फ हवा-हवाई बातें नहीं कीं, बल्कि युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए देश का सबसे सख्त ‘नकल विरोधी कानून’ लागू किया। इसके अलावा समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण विरोधी कानून और सख्त भू-कानून जैसे ठोस कदम उठाए गए हैं। इन फैसलों का सीधा मकसद प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना और देवभूमि की मूल पहचान, परंपराओं और संस्कृति को बचाए रखना है, ताकि विकास के नए आयाम स्थापित किए जा सकें।
इंफ्लुएंसर्स को मिला सरकार का खुला साथ
संवाद कार्यक्रम के दौरान एक अच्छी बात यह रही कि यह सिर्फ एकतरफा भाषण नहीं था। कई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स ने भी अपने डिजिटल सफर के अनुभव और अहम सुझाव मंच पर साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार स्टार्टअप, नवाचार (इनोवेशन), खेल और पर्यटन के क्षेत्र में युवाओं के हर अच्छे सुझाव का खुले दिल से स्वागत करती है। सरकार लगातार ऐसी नीतियां बना रही है जिससे युवा स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
कुल मिलाकर हल्द्वानी का यह कार्यक्रम इस बात का साफ संकेत है कि उत्तराखंड सरकार अब जमीनी स्तर के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और युवाओं को अपना साझीदार बना रही है। इस खास मौके पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट, दायित्वधारी शंकर कोरंगा, मेयर गजराज सिंह बिष्ट और गोविंद सिंह समेत तमाम स्थानीय नेता व गणमान्य लोग मौजूद रहे। अब देखना दिलचस्प होगा कि सीएम की इस अपील के बाद देवभूमि के युवा सोशल मीडिया पर राज्य की ब्रांडिंग को किस नए मुकाम तक ले जाते हैं।
