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गर्मी बढ़ते ही भड़की उत्तराखंड के जंगलों में आग, 24 घंटे में 250 से ज्यादा अलर्ट; मसूरी से चकराता तक दहशत

By: Sansar Live Team

On: Monday, May 25, 2026 6:46 PM

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देहरादून। पहाड़ों पर जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, वैसे-वैसे उत्तराखंड के जंगलों में आग का कहर भी बढ़ता जा रहा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि रविवार को एक ही दिन में पूरे प्रदेश के भीतर 250 से ज्यादा फॉरेस्ट फायर अलर्ट जारी किए गए। आग इतनी तेजी से फैल रही है कि वन विभाग और फायर ब्रिगेड की टीमों के पसीने छूट गए हैं। खास तौर पर मसूरी और चकराता के रिहायशी इलाकों के करीब जिस तरह से जंगल धधके हैं, उसने स्थानीय लोगों को भारी दहशत में डाल दिया है।

दरअसल, गर्मी के मौसम में पहाड़ों का सुलगना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार आग के फैलने की रफ्तार डराने वाली है। राजधानी देहरादून की ही बात करें तो महज 24 घंटे के अंदर 21 अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। दून फायर सर्विस के आपातकालीन नंबर पर लगातार लोगों की कॉल्स आ रही हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिनव त्यागी की मानें तो देहरादून शहर में 12, विकासनगर और डोईवाला में 3-3, जबकि ऋषिकेश में दो स्थानों पर आग भड़की। इसके अलावा कुआंवाला, जौलीग्रांट एयरपोर्ट के करीब, आमवाला और पौंधा के जंगलों में भी लपटें उठने के बाद दमकल विभाग को भारी मशक्कत के साथ मोर्चा संभालना पड़ा।

मसूरी में बस्तियों तक मंडराया खतरा

रविवार शाम मसूरी के मशहूर कैमल बैक रोड पर भी हालात उस वक्त अचानक बिगड़ गए, जब निरंकारी भवन के ठीक नीचे चीड़ के जंगल में भयंकर आग लग गई। पहाड़ों पर चलने वाली तेज हवाओं और जमीन पर बिछे सूखे पिरूल (चीड़ की पत्तियों) ने आग में घी का काम किया। देखते ही देखते करीब आधा हेक्टेयर वन संपदा जलकर खाक हो गई। चूंकि यह इलाका कैंट और निजी वनों से सटा हुआ है, इसलिए आग की लपटें सीधे रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ने लगी थीं, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

बताया जा रहा है कि यह इलाका बेहद दुर्गम और ढलान वाला है। ऐसे में वहां तक दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच सकती थीं। हालात बिगड़ते देख वन विभाग के कर्मचारियों को पैदल ही गहरी खाई और ढलान में उतरकर आग बुझाने का काम शुरू करना पड़ा। डीएफओ अमित कंवर के मुताबिक, करीब चार घंटे की जी-तोड़ मेहनत के बाद रात दस बजे तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। वहीं, स्थानीय निवासी हरपाल सिंह बताते हैं कि अगर समय रहते वनकर्मी वहां नहीं पहुंचते और बचाव कार्य शुरू नहीं होता, तो लपटें बस्तियों को अपनी चपेट में ले लेतीं और बड़ा हादसा हो सकता था।

उत्तराखंड के जंगलों में आग से चकराता में स्वाहा हुई दुकान

उधर, चकराता छावनी परिषद के तहत आने वाले बरोरी क्षेत्र में भी सड़क किनारे के जंगल सुलग उठे। इस आग को बुझाने में टीम को पूरे सात घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। साहिया-क्वानू मोटर मार्ग स्थित फेडूलानी में तो आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि इसकी चपेट में आकर एक दो मंजिला दुकान पूरी तरह जलकर राख हो गई। हालात को काबू में करने के लिए छावनी परिषद के कर्मचारियों को देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा।

लगातार बिगड़ते इन हालातों को देखते हुए वन विभाग अब सख्त एक्शन मोड में आ गया है। असल में, कई बार जंगलों में आग प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही या जानबूझकर की गई शरारत की वजह से लगती है। इसे देखते हुए पौड़ी जिले के बुआखाल और कालेश्वर बीट में जंगलों में आग लगाने के शक में दो अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं। गढ़वाल के डीएफओ महातिम यादव ने स्पष्ट किया है कि जंगलों की आग का अब नापखेतों और रिहायशी बस्तियों तक पहुंचना बेहद चिंता का विषय है। विभाग अब जंगलों में आग लगाने वाले ऐसे शरारती तत्वों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई कर रहा है ताकि इस तबाही को रोका जा सके।

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