देहरादून की सड़कें आज मशालों की रोशनी और हजारों महिलाओं के बुलंद नारों से गूंज उठीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित ‘महिला आक्रोश मशाल यात्रा’ में उमड़े जनसैलाब ने यह साफ कर दिया कि प्रदेश की मातृशक्ति अब अपने अधिकारों को लेकर किसी भी मोर्चे पर पीछे हटने वाली नहीं है। गांधी पार्क से शुरू होकर घण्टाघर तक गई इस यात्रा में जिस तरह से महिलाएं सड़कों पर उतरीं, उसने न केवल राज्य बल्कि केंद्र की राजनीति के लिए भी एक बड़ा संदेश दे दिया है।
दरअसल, यह पूरा प्रदर्शन महिला आरक्षण बिल को लेकर पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध के खिलाफ था। मुख्यमंत्री धामी ने खुद हाथ में मशाल थामकर इस यात्रा की कमान संभाली। यात्रा के दौरान महिलाओं का जोश देखते ही बन रहा था। बताया जा रहा है कि इस भारी भीड़ ने विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह शक्ति प्रदर्शन सीधा उन ताकतों को जवाब था जिन्होंने महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटकाने की कोशिश की है।
विपक्ष पर तीखा हमला: धामी बोले- अब चुप नहीं रहेगी नारी
मशाल यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तेवर काफी कड़े नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर विपक्ष की मानसिकता को ‘महिला विरोधी’ करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मशाल यात्रा महज एक प्रतीकात्मक जुलूस नहीं है, बल्कि उस आक्रोश की ज्वाला है जो उन लोगों के खिलाफ भड़की है जो दशकों तक महिलाओं को उनके हक से वंचित रखते आए हैं। धामी ने जोर देकर कहा कि जिस महिला आरक्षण बिल को वर्षों तक फाइलों में दबाकर रखा गया, उसे जब आज की सरकार आगे बढ़ा रही है, तो कुछ दल अपनी राजनीति चमकाने के लिए इसमें अड़ंगे डाल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, “आज की नारी अब अबला नहीं है, वह जागरूक है और निर्णायक शक्ति बन चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने हमेशा महिलाओं को केवल एक ‘वोट बैंक’ की तरह देखा, लेकिन उनकी असल सशक्तिकरण की बात आई तो वे पीछे हट गए। सीएम ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि “अब नारी चुप नहीं रहेगी”, और आने वाले समय में वह अपने अपमान और अधिकारों के हनन का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
देहरादून की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन: क्या हैं इसके सियासी मायने?
गांधी पार्क से घण्टाघर तक का नजारा आज किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट जैसा लग रहा था। इस महिला आक्रोश मशाल यात्रा में केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग कोनों से आई हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री धामी ने इस यात्रा के जरिए एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तरफ जहां उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के रुख को स्पष्ट किया, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत यानी ‘मातृशक्ति’ को एकजुट कर विपक्ष की घेराबंदी कर दी है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और विधायक सविता कपूर जैसी कद्दावर महिला नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावी बना दिया। रेखा आर्य ने कहा कि समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से कुछ परिवारवादी दल असहज महसूस कर रहे हैं, यही वजह है कि वे महिला आरक्षण की राह मुश्किल करना चाहते हैं। लेकिन आज उमड़ी इस भीड़ ने बता दिया है कि उत्तराखंड की महिलाएं अपनी लड़ाई खुद लड़ना जानती हैं।
सिर्फ विरोध नहीं, यह नए भारत की नारी का संकल्प है
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए ऐतिहासिक प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज नीतियां केवल कागजों पर नहीं बन रहीं, बल्कि जमीन पर उनका असर दिख रहा है। चाहे उज्ज्वला योजना हो या स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाली मदद, हर कदम ने नारी को आत्मनिर्भर बनाया है। असल में, यह मशाल यात्रा उसी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का प्रतिबिंब थी।
अंत में, यह मशाल यात्रा एक बड़े संकल्प के साथ समाप्त हुई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की महिलाओं को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदेश की मातृशक्ति खुशहाल और सशक्त नहीं होगी, तब तक विकसित उत्तराखंड का सपना अधूरा है। इस यात्रा के माध्यम से जो राजनीतिक संदेश गया है, वह आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत को एक नई दिशा दे सकता है।
