उत्तराखंड विधानसभा में आज का माहौल कुछ अलग था। मौका था ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र का, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न केवल प्रदेश की मातृशक्ति का गौरव गान किया, बल्कि महिला आरक्षण बिल यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर विपक्ष की भूमिका पर भी तीखा हमला बोला। सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयासों पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए इस बिल को जल्द से जल्द लागू करने का संकल्प पेश किया।
मुख्यमंत्री के भाषण में भावुकता भी थी और राजनीति का जवाब भी। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखंड की उन महान महिलाओं को नमन करते हुए की, जिन्होंने राज्य निर्माण से लेकर समाज सुधार तक में अपनी जान लगा दी। गौरा देवी, तीलू रौतेली और सरला बहन जैसी विभूतियों का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि उत्तराखंड की धरती हमेशा से अदम्य साहस की प्रतीक रही है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने सदन को याद दिलाया कि नारी शक्ति अब केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नेतृत्व की भूमिका निभा रही है—चाहे वह चंद्रयान मिशन हो या सरहद पर सेना की कमान।
विपक्ष पर तीखा प्रहार और महाभारत का जिक्र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में उस घटना का जिक्र किया जब 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प था कि देश की आधी आबादी को उनका पूरा हक मिले, लेकिन विपक्ष ने मिलकर इस ऐतिहासिक पहल को रोक दिया। धामी ने तल्ख लहजे में कहा, “जब लोकसभा में संख्या बल के कारण यह बिल पारित नहीं हो पाया, तो विपक्षी नेता तालियां बजा रहे थे। असल में वह दृश्य देखकर मुझे महाभारत की वह सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष अब इस महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। धामी ने तंज कसते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने वालों ने कभी महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए और आज जब काम हो रहा है, तो उसमें अड़ंगे डाल रहे हैं।
रसोई से रायसीना हिल तक का सफर
सशक्तिकरण के आंकड़ों को पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पांच गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश की बेटियां रसोई से लेकर रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ और ‘तीन तलाक’ के खिलाफ बने कानून का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प से आज मुस्लिम बहनों को भी कुप्रथाओं से आजादी मिली है।
धामी ने यह भी बताया कि अगर यह बिल पास हो जाता तो उत्तराखंड को बड़ा फायदा होता। परिसीमन के बाद प्रदेश की विधानसभा सीटों की संख्या 105 तक जा सकती थी, जिसमें 35 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं। सांसदों की संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि विपक्ष आखिर क्यों नहीं चाहता कि सामान्य घरों की महिलाएं राजनीति के शीर्ष पर पहुंचें?
उत्तराखंड में ‘धामी मॉडल’ और लखपति दीदी
अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण के लिए इस साल जेंडर बजट में 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने ‘लखपति दीदी’ योजना का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से ज्यादा बहनें आज आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर प्रदेश सरकार ने महिलाओं को मजबूत करने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने अंत में समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने यूसीसी लागू कर महिलाओं को हलाला, इद्दत और बहुविवाह जैसी कुरीतियों से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने विपक्ष से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मातृशक्ति के सम्मान में खड़े होने की अपील की। मुख्यमंत्री को भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘नारी शक्ति वंदन’ का यह संकल्प एक दिन अवश्य पूरा होगा।
