उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण में दिवंगत युवती के माता-पिता शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मुख्यालय पहुंचे। Ankita Bhandari Case में इंसाफ की मांग को लेकर पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की और अब तक अनसुलझे रहे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी अधिकारियों को सौंपी।
सीबीआई के सूचना अनुभाग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अधिकारियों ने परिजनों की बात को गंभीरता से दर्ज किया। एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रकरण से जुड़े प्रत्येक बिंदु का समुचित परीक्षण किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कानूनी खामी या संदेह बाकी न रहे और विवेचना पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ाई जाएगी।
Ankita Bhandari Case: परिजनों ने रखे अनसुलझे सवाल
सीबीआई मुख्यालय में हुई इस बैठक को कानूनी नजरिए से अहम माना जा रहा है। परिजनों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में कई ऐसी कड़ियां हैं जिनकी अब तक मुकम्मल छानबीन नहीं हो सकी है। उन्होंने जांच अधिकारियों के सामने वह तमाम सवाल रखे, जिन्हें लेकर उत्तराखंड की जनता और परिजन लंबे समय से जवाब मांगते रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि इन सवालों की तह तक पहुंचे बिना न्याय अधूरा रहेगा। उनकी मांग है कि सीबीआई उन सभी बिंदुओं को अपनी जांच के दायरे में शामिल करे, जो अब तक अनछुए रह गए हैं।
परिजनों के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों को वे सभी बिंदु लिखित रूप में सौंपे हैं, जिन पर अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि जांच के दायरे को व्यापक किया जाना चाहिए, ताकि कोई भी पहलू अनदेखा न रह जाए और हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सके।
बैठक के दौरान परिजनों ने जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात विस्तार से रखी। सीबीआई के सूचना अनुभाग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, एजेंसी प्रकरण से जुड़े प्रत्येक बिंदु का समुचित परीक्षण करेगी और विवेचना को निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ाएगी।
पृष्ठभूमि: सितंबर 2022 का मामला
ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या का यह मामला सितंबर 2022 से ही सुर्खियों में रहा है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके साथियों को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हालांकि, शुरुआत से ही उस कथित वीआईपी गेस्ट की भूमिका पर सवाल उठते रहे, जिसे लेकर अतिरिक्त सेवाएं देने का दबाव बनाने का आरोप सामने आया था।
इसके अलावा, घटना के ठीक बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ था। परिजनों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया था कि कमरों को तोड़ने से महत्वपूर्ण डिजिटल और भौतिक साक्ष्य प्रभावित हुए। परिजनों का मानना है कि इन पहलुओं की जांच के बिना प्रकरण की तस्वीर अधूरी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण पौड़ी गढ़वाल से लेकर देहरादून तक लगातार चर्चा में रहा है और परिजनों की दिल्ली यात्रा को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय एजेंसी परिजनों द्वारा सौंपे गए बिंदुओं पर आगे क्या रुख अपनाती है और जांच किस दिशा में बढ़ती है।









