मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

Rah Veer Yojana Uttarakhand: सड़क हादसे में घायल की मदद करने पर मिलेंगे ₹25,000, ₹1.5 लाख तक मुफ्त इलाज

On: October 16, 2026 11:13 PM
Follow Us:
Rah Veer Yojana
---Advertisement---
वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

सड़क हादसे के बाद घायल को तड़पता छोड़ आगे निकल जाने की हिचक अब पूरी तरह खत्म होने वाली है। Rah Veer Yojana के तहत दुर्घटना के पहले 60 मिनट यानी गोल्डन आवर में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले किसी भी नेक राहगीर को 25,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके साथ ही हादसे के शिकार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचते ही 1.50 लाख रुपये तक का पूरी तरह कैशलेस और मुफ्त आपातकालीन उपचार मिलेगा।

देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में आयोजित सड़क सुरक्षा एवं आपातकालीन उपचार संगोष्ठी में कैबिनेट मंत्री खजान दास और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने इस जीवन रक्षक व्यवस्था को जमीन पर उतारने का स्पष्ट खाका पेश किया। केंद्र और राज्य सरकार के साझा ढांचे के तहत बनी इस व्यवस्था का मकसद सड़क पर हर साल होने वाली हजारों असमय मौतों को रोकना है।

Rah Veer Yojana: गोल्डन आवर में मदद पर नकद इनाम

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए पहला एक घंटा जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे नाजुक कड़ी होता है। संगोष्ठी में मौजूद परिवहन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि नेक राहगीर (राह-वीर) योजना का मूल मकसद आम नागरिकों के मन से पुलिसिया डर निकालना है। जो व्यक्ति घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाएगा, उसे न सिर्फ 25 हजार रुपये का त्वरित नकद पुरस्कार मिलेगा, बल्कि सालभर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चुनिंदा राह-वीरों को राष्ट्रीय स्तर पर 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा।

कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि सड़क पर किसी की जान बचाना सबसे बड़ा मानवीय धर्म है और सरकार ने ऐसी व्यवस्था बनाई है जिससे मददगार को किसी भी थाने या अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ें। दरअसल, अक्सर लोग इसी डर से मदद करने से कतराते हैं कि उन्हें पुलिस पूछताछ में फंसाया जाएगा।

पुलिस पूछताछ का डर खत्म, कैशलेस इलाज की गारंटी

संगोष्ठी में रखे गए आधिकारिक आंकड़े बेहद खौफनाक हकीकत बयां करते हैं। देश में हर साल करीब 5.13 लाख सड़क हादसे दर्ज होते हैं, जिनमें 1.83 लाख लोगों की असमय मौत हो जाती है और 4.6 लाख लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। इसका सीधा मतलब है कि देश की सड़कों पर औसतन हर एक घंटे में 21 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, जिनमें 18 से 34 वर्ष के युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि घायल व्यक्ति सिर्फ एक आंकड़ा नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार का सहारा होता है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायल को 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देने का नियम लागू किया गया है, ताकि पैसे के अभाव या परिजनों के पहुंचने के इंतजार में इलाज में एक मिनट की भी देरी न हो।

112 नंबर और अस्पतालों का सीधा समन्वय

इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए डिजिटल निगरानी तंत्र तैयार किया गया है। अब सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन नंबर 112, पुलिस का ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी का टीएमएस 2.0 (ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) आपस में सीधे जुड़ेंगे। जिलाधिकारी ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए कि वे पोर्टल पर बिना किसी कागजी देरी के घायलों का पंजीकरण करें और इलाज तुरंत शुरू करें।

इस मौके पर परिवहन महानिदेशक अनिल गर्व्याल, शिक्षा निदेशक खड़क सिंह दत्ताल, संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा, अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार शर्मा और आरटीओ अनिता चमोला ने भी सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ फील्ड में मुस्तैद रहने के निर्देश दिए।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment