उत्तराखंड के किसानों के लिए त्योहारी सीजन से पहले ही बड़ी राहत की खबर आ गई है। Kisan Crop Compensation Uttarakhand के तहत राज्य सरकार ने हाल की भारी बारिश और ओलावृष्टि में बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा व्यावहारिक रूप से दोगुना करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि कृषि, बागवानी और गन्ने की फसलों को हुए नुकसान की पूरी भरपाई की जाएगी, और आपदा राहत नियमों के तहत मिलने वाली मदद के बराबर अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी किसानों को दी जाएगी।
दरअसल, इसका सीधा मतलब यह है कि जिन किसानों की फसलें तबाह हुई हैं, उन्हें अब डबल फायदा मिलेगा। सरकार के इस फैसले से पहाड़ से लेकर मैदान तक के हजारों अन्नदाताओं को बड़ी आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नुकसान का आकलन जल्द से जल्द पूरा कर प्रभावित किसानों की सूची तैयार की जाए, ताकि हक का पैसा समय पर सीधे उनके हाथों तक पहुंच सके।
Kisan Crop Compensation: आपदा नियमों के बराबर अतिरिक्त सहायता
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य में कृषि, बागवानी और गन्ने की फसलों को जो भारी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। आपदा राहत नियमों के हिसाब से मिलने वाली मदद के बराबर ही किसानों को अपनी ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। यानी मुआवजे की कुल राशि पहले से काफी ज्यादा हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को अगली फसल की तैयारी में जरूरी आर्थिक संबल मिलेगा और वे कर्ज के बोझ तले दबने से बच सकेंगे।
बताया जा रहा है कि नुकसान के आकलन के लिए राजस्व और कृषि विभाग की टीमें पहले से ही मैदान में उतर चुकी हैं। खेत-खेत जाकर फसल क्षति का सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही प्रभावित किसानों की सूची तैयार कर राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
बिजली बिल टले, KCC ऋण पर तीन महीने की मोहलत की मांग
सिर्फ मुआवजे पर ही बात खत्म नहीं होती। सरकार ने किसानों के सिर पर मंडरा रहे बिलों के बोझ को भी हल्का कर दिया है। अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक के बिजली बिलों के भुगतान को फिलहाल टाल दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह माफी नहीं है, लेकिन इससे किसानों को तुरंत पैसा चुकाने के तनाव से बड़ी राहत मिल जाएगी और वे अपनी नकदी फसल की तैयारी में लगा सकेंगे।
इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के ऋण को चुकाने के लिए केंद्र सरकार से तीन महीने की मोहलत मांगने का फैसला भी लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे किसान बिना किसी दबाव के अपनी अगली फसल की तैयारी कर सकेंगे और उन पर कर्ज चुकाने की जल्दबाजी का बोझ नहीं रहेगा। असल में, फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्ज की किश्त ही होती है, और इसी दर्द को समझते हुए यह कदम उठाया गया है।
9 अक्टूबर की ओलावृष्टि के बाद सीएम ने खुद लिया था जायजा
गौरतलब है कि 9 अक्टूबर को राज्य के कई हिस्सों में ओलावृष्टि और तूफानी बारिश ने भारी तबाही मचाई थी। ऊधम सिंह नगर के बाजपुर समेत कई इलाकों में फसलें पूरी तरह चौपट हो गई थीं। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने खुद हवाई और जमीनी दौरा किया था और किसानों से मिलकर उनका दर्द जाना था। उसी दौरे के बाद से ही बड़े राहत पैकेज की अटकलें लगाई जा रही थीं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई किसानों की तो पूरी की पूरी फसल खेत में ही बर्बाद हो गई थी, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया था। अब सरकार के इस बड़े और संवेदनशील कदम से अन्नदाताओं के चेहरों पर उम्मीद लौटी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मुआवजा मिलने से किसान रबी सीजन की बुवाई भी समय पर कर पाएंगे, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।









