देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अटके बुनियादी ढांचों को रफ्तार देने के लिए 70 करोड़ रुपये का बजट खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न जनपदों में विकास योजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए यह वित्तीय स्वीकृति दी है। इस पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा दो प्रमुख संकटों पर केंद्रित है — उत्तरकाशी की मोरी-नैटवाड़-जखोल सीमांत सड़क पर दशकों से नासूर बने तीन खतरनाक भूस्खलन क्षेत्रों का स्थाई उपचार, यानी Uttarkashi Landslide Treatment, और देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय ‘पंतनगर’ के बदहाल आंतरिक मार्गों का कायाकल्प। अकेले इन दोनों कार्यों पर करीब 40 करोड़ रुपये झोंके गए हैं।
शासन से जारी आदेश के मुताबिक उधमसिंह नगर के किच्छा विधानसभा क्षेत्र स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के जर्जर हो चुके आंतरिक मार्गों के सुधार के लिए 19.99 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र में मोरी-नैटवाड़-जखोल राज्य मार्ग संख्या-48 के किलोमीटर-09 पर हर साल यातायात ठप करने वाले क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के उपचार के लिए 5.35 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
Uttarkashi Landslide Treatment: 20 करोड़ से बारहमासी बनेगा संपर्क
इसी संवेदनशील बेल्ट में दो अन्य क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के स्थाई सुरक्षा कार्यों के लिए 14.50 करोड़ रुपये की अलग से वित्तीय स्वीकृति दी गई है। यानी करीब 20 करोड़ रुपये सीधे तौर पर पहाड़ी रास्तों को भूस्खलन-मुक्त बनाने पर खर्च होंगे। इसका सीधा फायदा टोंस घाटी और सीमांत गांवों को मिलेगा, जिनका संपर्क अब बारहमासी बना रहेगा।
दरअसल, आपदा और बारिश के दौरान मोरी-सांकरी-जखोल मार्ग बंद होने से हरकूद, सेवा, ढाटमीर और जखोल घाटी के दर्जनों गांवों की लाइफलाइन कट जाती थी। मरीज और सेब उत्पादक किसान हफ्तों फंसे रहते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के महीनों में यह रूट लंबे समय तक बंद रहता था, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और सेब की फसल दोनों पर भारी असर पड़ता था। अब स्थाई उपचार से इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है।
पंतनगर विश्वविद्यालय के जर्जर मार्गों का कायाकल्प
देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय के रूप में मशहूर पंतनगर के परिसर में देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों और हजारों छात्रों को गड्ढों से जूझना पड़ रहा था। 19.99 करोड़ रुपये की इस मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय के आंतरिक मार्गों का पूरी तरह कायाकल्प होगा। सीएम धामी की घोषणाओं के तहत इन दोनों प्राथमिकताओं को पहले चरण में ही बजट आवंटन मिल गया है, जो सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
पिथौरागढ़ से हरिद्वार तक: 70 करोड़ का पूरा हिसाब
70 करोड़ के इस पैकेज में पर्वतीय और मैदानी, दोनों तरह के इलाकों का ध्यान रखा गया है। पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र में 7.740 किलोमीटर लंबे पोखरी-चंडिकाघाट मोटर मार्ग के सुधारीकरण के लिए 5.38 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट मंजूर हुआ है। देहरादून के सहसपुर स्थित झाझरा, बंशीवाला अंबेडकर पार्क से काली मंदिर, सैनिक कॉलोनी और सुद्धोवाला वार्ड 8 व 9 के आंतरिक मार्गों और नालियों के लिए 76.60 लाख रुपये मंजूर कर 45.96 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।
हरिद्वार के रसूलपुर-मंगोलपुरा-आर्यनगर और लालढांग के बीच बरसात में उफनने वाली रावासन नदी पर 9.34 करोड़ रुपये से 250 मीटर लंबा स्टील ट्रस पैदल पुल बनेगा, जिससे ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं करनी पड़ेगी। चंपावत में मां पूर्णागिरी मेला क्षेत्र में विश्राम शेड और पुलिया निर्माण के लिए 77.22 लाख रुपये स्वीकृत कर 46.33 लाख रुपये तत्काल जारी किए गए हैं। गदरपुर के 10 अलग-अलग ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों — जयनगर, चंडीपुर, दिनेशपुर, केशवगढ़, लालपुरी, खटोला, कुल्हा — में सामुदायिक सुविधाओं व धर्मशाला निर्माण को 2.67 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
पुलिस महकमे को मजबूत करने के लिए नरेंद्रनगर पीटीसी में भवनों के लिए 9.71 करोड़ और अल्मोड़ा के सल्ट थाने में आवासीय भवन हेतु 3.80 करोड़ रुपये (पहली किस्त 1.52 करोड़) मंजूर किए गए हैं। साथ ही ईको टास्क फोर्स की 10 नर्सरियों में आधुनिक सिंचाई तंत्र लगाने को 78.50 लाख रुपये का अनुमोदन दिया गया है। कुल मिलाकर यह 70 करोड़ का पैकेज पहाड़ से मैदान तक विकास की रफ्तार को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।









