राजधानी देहरादून की शराब दुकानों पर प्रिंट रेट से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने आधी रात को बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद पांच प्रशासनिक अधिकारियों ने आबकारी विभाग की टीमों को साथ लेकर शहर के प्रमुख इलाकों में एक साथ औचक निरीक्षण किया। अचानक हुई इस कार्रवाई (Dehradun Liquor Shop Raid) से ठेका संचालकों में भगदड़ मच गई।
सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी और एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह की संयुक्त टीम जब माजरा और पटेलनगर क्षेत्र में जांच करने पहुंची, तो वहां शराब की ओवररेटिंग की पुष्टि हुई। आईएसबीटी स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान पर जांच के दौरान 42 बोतलों के बैच नंबर सरकारी स्टॉक रजिस्टर से मेल नहीं खा रहे थे। दुकान के काउंटर पर अनाधिकृत लोग शराब बेचते पाए गए, जिनका कोई आधिकारिक सत्यापन नहीं था।
Dehradun Liquor Shop Raid: रेट लिस्ट तक नहीं थी चस्पा
मौके पर आबकारी विभाग द्वारा तय रेट लिस्ट तक चस्पा नहीं की गई थी, जिससे साफ जाहिर था कि ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे थे। दरअसल, नियमों के मुताबिक हर दुकान पर रेट बोर्ड प्रमुखता से प्रदर्शित होना अनिवार्य है, लेकिन यहां इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन ठेकों पर लंबे समय से एमआरपी से ज्यादा वसूली की शिकायतें मिल रही थीं।
एसडीएम मुख्यालय रविंद्र ज्वांठा ने प्रेमनगर क्षेत्र की दुकानों की पड़ताल की, जहां स्टॉक रजिस्टर कई दिनों से अपडेट नहीं किया गया था। उधर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट राहुल आनंद और हर्षिता सिंह की टीम ने राजपुर रोड और जाखन क्षेत्र में दबिश दी। जांच में सामने आया कि ठेकों पर न तो आबकारी विभाग का टोल-फ्री शिकायत नंबर लिखा था और न ही वैध सेल्समैन मौजूद थे।
सीसीटीवी और वैध सेल्समैन के नियमों की उड़ रही थीं धज्जियां
नियमों के मुताबिक शराब की हर दुकान पर सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में और रेट बोर्ड प्रमुखता से प्रदर्शित होना अनिवार्य है, लेकिन कई जगह इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। बताया जा रहा है कि कुछ दुकानों पर कैमरे या तो बंद थे या फिर लगे ही नहीं थे, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह लापरवाही महज संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगती है। जब न तो रेट लिस्ट होगी और न ही निगरानी, तो ग्राहक से मनमाना पैसा वसूलना आसान हो जाता है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने सभी ठेकों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
ओवररेटिंग पर लाइसेंस निरस्तीकरण तक की चेतावनी
जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्पष्ट किया है कि एमआरपी से एक रुपया भी ज्यादा वसूलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड आबकारी अधिनियम के तहत दोषी अनुज्ञापियों पर भारी जुर्माने के साथ-साथ दुकान का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है। आने वाले दिनों में भी रात के समय औचक निरीक्षण जारी रहेंगे ताकि ओवररेटिंग के सिंडिकेट को तोड़ा जा सके। डीएम की इस सख्ती के बाद ठेका संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है और उम्मीद है कि अब ग्राहकों को सही दाम पर शराब मिल सकेगी।












