शारदीय नवरात्रि के पहले दिन Dhami Navratri Puja की खबर पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बनी रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को मुख्यमंत्री आवास में मां दुर्गा के समक्ष नतमस्तक हुए और अपनी पत्नी के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। पूजा के दौरान मां दुर्गा के जयकारों से आवास का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
मुख्यमंत्री ने इस विशेष अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूरे प्रदेश को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने हर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री आवास में हुए इस धार्मिक अनुष्ठान को प्रदेश में आस्था के एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
Dhami Navratri Puja: प्रदेश के लिए मांगा वरदान
मुख्यमंत्री धामी ने मां दुर्गा से प्रदेश के हर परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य की भी प्रार्थना की और मां दुर्गा से राज्य के निरंतर विकास और खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
असल में उत्तराखंड की जनता अपनी धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रथम दिवस पर की गई इस पूजा को पहाड़ के भरोसे और आस्था का प्रतीक माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पूजा-अर्चना के दौरान आवास में मौजूद लोगों ने भी मां के जयकारे लगाए, जिससे वातावरण और भी भक्तिमय हो उठा।
शैलपुत्री पूजा का खास महत्व
नवरात्रि के शुभारंभ वाले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और प्रकृति के स्वरूप के रूप में पूजी जाती हैं। देवभूमि उत्तराखंड में नवरात्रि के पहले दिन की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है — घर-घर में घटस्थापना होती है और मां के नौ दिनों तक चलने वाले अनुष्ठान की शुरुआत होती है।
दरअसल नवरात्रि के पहले दिन की पूजा पूरे नौ दिवसीय अनुष्ठान की नींव मानी जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और उसके बाद नौ दिनों तक निरंतर पूजा-पाठ चलता है। मुख्यमंत्री आवास में भी इसी परंपरा का पालन करते हुए मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पूजा में मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी भी शामिल रहीं।
धार्मिक जानकारों के अनुसार पहले दिन की पूजा में व्रत का संकल्प लिया जाता है और मां शैलपुत्री से साहस, धैर्य और स्थिरता का आशीर्वाद मांगा जाता है। पहाड़ के घरों में इस दिन महिलाएं सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुट जाती हैं और शाम को परिवार के साथ मिलकर आरती की जाती है।
देवभूमि के शक्तिपीठों में नवरात्रि का उल्लास
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां मां दुर्गा के अनेक प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित हैं। कुंजापुरी, सुरकंडा देवी, चंद्रबदनी, नंदा देवी, धारी देवी और नैनीताल की नैना देवी — ये सभी धाम साल भर श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं, लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में इन मंदिरों में विशेष भीड़ उमड़ती है। देश भर से भक्त मां के दर्शनों के लिए पहाड़ों की ओर रुख करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार उत्तराखंड में नवरात्रि सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि संस्कृति का उत्सव है। गांव-गांव में जागर गाए जाते हैं, रात में भजन-कीर्तन का आयोजन होता है और अष्टमी-नवमी को कन्या पूजन की परंपरा बड़े श्रद्धाभाव से निभाई जाती है। पहाड़ की हर घाटी में इन दिनों मां के जयकारे गूंजते हैं और पूरा वातावरण आस्था से भर जाता है।
नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखते हैं, फलाहार करते हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। मंदिरों में सुबह-शाम विशेष आरती होती है और भक्त मां के नौ स्वरूपों की क्रमवार पूजा करते हैं। नवरात्रि के ये नौ दिन पूरे प्रदेश में आस्था, भक्ति और उल्लास का माहौल बनाए रखेंगे। अष्टमी और नवमी को मंदिरों में कन्या पूजन के साथ नवरात्रि के इस पर्व का समापन होगा।












