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Nanda Gaura Yojana Uttarakhand: बेटी के जन्म पर 11 हजार, 12वीं पास पर 51 हजार — 4 लाख से ज्यादा बेटियों को मिला लाभ

On: October 11, 2026 5:09 PM
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Nanda Gaura Yojana Uttarakhand: बेटी के जन्म पर 11 हजार, 12वीं पास पर 51 हजार — 4 लाख से ज्यादा बेटियों को मिला लाभ
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

कभी आर्थिक तंगी के चलते बेटियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती थी, लेकिन अब उत्तराखंड में तस्वीर बदल रही है। Nanda Gaura Yojana Uttarakhand के तहत बेटी के जन्म पर 11 हजार रुपये और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर 51 हजार रुपये की सीधी वित्तीय मदद दी जा रही है, जिसका लाभ अब तक 4 लाख से अधिक बेटियां ले चुकी हैं।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर देहरादून के आईआरटीडी प्रेक्षागार में आयोजित ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डिजिटल शिक्षा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड बोर्ड की 149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन सौंपे गए, और साथ ही घोषणा हुई कि अब राजकीय विद्यालयों के कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में धनराशि भेजी जाएगी।

Nanda Gaura Yojana Uttarakhand: बेटियों के लिए बदलती जमीनी तस्वीर

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि कन्या पूजन केवल पारंपरिक रस्म तक सीमित नहीं रह सकता; इसकी वास्तविक सार्थकता तभी है जब बेटियों को आधुनिक तकनीक, समान अवसर और भयमुक्त सुरक्षा कवच मिले। दरअसल, टैबलेट खरीद में होने वाली देरी और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए यह बजट सीधे छात्र-छात्राओं या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।

बोर्ड परीक्षाओं में परचम लहराने वाली 149 छात्राओं को स्मार्टफोन देने का उद्देश्य उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। कार्यक्रम में मौजूद महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि सरकार का यह कदम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के योग्य तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

महिला आरक्षण से लेकर पॉक्सो पीड़ितों तक के लिए सुरक्षा कवच

मुख्यमंत्री ने राज्य की बेटियों और युवाओं के लिए तैयार किए गए कानूनी सुरक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत का मजबूत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि अनाथ बच्चों के लिए भी 5 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।

बताया जा रहा है कि पॉक्सो मामलों से पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता, समय पर न्याय और मानसिक संबल देने के लिए हर जनपद में विशेष ‘सपोर्ट पर्सन’ तैनात किए गए हैं। इसके अलावा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून लागू है, जिसके दम पर पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मुफ्त किताबों से ‘ड्रोन दीदी’ तक, स्वरोजगार के प्रोजेक्ट

शिक्षा को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए कक्षा 1 से 12वीं तक मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, निशुल्क साइकिल वितरण और दूरदराज के क्षेत्रों में महिला छात्रावासों की सुविधा दी जा रही है। केवल स्कूली शिक्षा ही नहीं, बल्कि आजीविका के लिए ‘ड्रोन दीदी’, ‘आलम्बन आर्ट’, ‘आलम्बन गांव’, ‘आलम्बन कैफे’ और उधम सिंह नगर व हरिद्वार में किशोरियों के हुनर तराशने के लिए ‘नव्या 2.0’ जैसे प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतारे गए हैं।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह और विभागीय निदेशक बंशीलाल राणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बहरहाल, सरकार का दावा है कि बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर चल रही इन योजनाओं से पहाड़ की जमीनी तस्वीर लगातार बदल रही है।

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