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Taran Adarsh Alpha Review: ‘खूबसूरत शरीर, लेकिन बेजान आत्मा’, ट्रेड एनालिस्ट बोले- कमजोर स्क्रीनप्ले ने डुबोई फिल्म

On: October 11, 2026 5:08 PM
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Taran Adarsh Alpha Review: 'खूबसूरत शरीर, लेकिन बेजान आत्मा', ट्रेड एनालिस्ट बोले- कमजोर स्क्रीनप्ले ने डुबोई फिल्म
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फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरन आदर्श ने यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की फिल्म अल्फा को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। आलिया भट्ट और शर्वरी स्टारर इस फिल्म के बारे में बात करते हुए आदर्श ने कहा कि फिल्म देखने में भले ही शानदार लगी, लेकिन कमजोर कहानी ने उसे डुबो दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Taran Adarsh Alpha को लेकर इतने सख्त थे कि उन्होंने इसे “खूबसूरत शरीर, लेकिन बेजान आत्मा” तक कह डाला। यानी लुक और एक्शन तो दमदार, लेकिन कहानी में जान नहीं।

एक इंटरव्यू में तरन आदर्श ने कहा कि आलिया भट्ट ने फिल्म के लिए जबरदस्त मेहनत की है और इसकी तारीफ होनी चाहिए। वह एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, लेकिन इस खास किरदार के लिए वह सही चुनाव नहीं लगीं। एक्शन सीन्स भी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगे। हालांकि, आदर्श का मानना है कि फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी कास्टिंग से ज्यादा स्क्रीनप्ले है। उनके मुताबिक, चूंकि अल्फा वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा है, इसलिए ‘पठान’, ‘टाइगर’ और ‘वॉर’ जैसी फिल्मों से तुलना होना लाजमी था, और अल्फा उस ऊंचे बेंचमार्क तक नहीं पहुंच पाई।

Taran Adarsh Alpha पर साफ राय

तरन आदर्श ने यह भी कहा कि फिल्म के कमर्शियल भविष्य को लेकर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। यह एक महंगी एक्शन फिल्म है, इसलिए वीकेंड का ट्रेंड अहम होगा। फीमेल-लेड फिल्म के लिहाज से ओपनिंग के आंकड़े सम्मानजनक रहे, लेकिन बॉक्स ऑफिस का असली खेल तो आगे ही तय होगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या दर्शक फीमेल-लेड फिल्मों को लेकर कम उत्साहित हैं, तो उन्होंने इससे इनकार किया। उनका कहना है कि अच्छी बनी फीमेल-लेड फिल्में हमेशा चली हैं — अगर कंटेंट दर्शकों से जुड़ता है, तो वे थिएटर जरूर आते हैं, चाहे लीड एक्टर हो या एक्ट्रेस।

टॉक्सिक पर भी वही शिकायत

दिलचस्प बात यह है कि अल्फा से पहले तरन आदर्श ने यश स्टारर ‘टॉक्सिक’ को लेकर भी लगभग यही बात कही थी। बॉलीवुड हंगामा को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि टॉक्सिक के न चलने की सबसे बड़ी वजह कमजोर राइटिंग थी। साथ ही उन्होंने यश की तारीफ करते हुए उन्हें “बहुत कॉन्फिडेंट” एक्टर बताया था। आदर्श के मुताबिक, टॉक्सिक तकनीकी तौर पर शानदार थी, विजुअल्स दमदार थे, यश का काम उम्दा था और कियारा आडवाणी व नयनतारा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले ने फिल्म की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। यानी दोनों ही फिल्मों में आदर्श का निष्कर्ष एक ही रहा — स्टार पावर और भव्यता के बावजूद कमजोर कहानी फिल्म को नहीं बचा सकी।

बॉक्स ऑफिस का सच: 59 करोड़ की कमाई, 100 करोड़ का बजट

बॉक्स ऑफिस के आंकड़े भी तरन आदर्श की बात की पुष्टि करते नजर आते हैं। कोइमोई की ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल्फा ने भारत में नेट 59.29 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि वर्ल्डवाइड ग्रॉस 99.07 करोड़ रुपये रहा। फिल्म का बजट करीब 100 करोड़ रुपये बताया गया है, यानी मेकर्स अपने निवेश का सिर्फ 59 फीसदी ही वसूल कर पाए। कोइमोई ने फिल्म का वर्डिक्ट “लूजिंग” दिया है, हालांकि 50 फीसदी से ज्यादा रिकवरी के चलते यह फ्लॉप के दायरे से बच गई। ट्रेड के मुताबिक, यशराज फिल्म्स को 40 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हुआ है।

कुल मिलाकर, तरन आदर्श की यह राय इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी जैसी है। बड़े बजट, बड़े सितारे और धमाकेदार एक्शन के दौर में भी अगर कहानी कमजोर है, तो दर्शक थिएटर से दूर ही रहेंगे। अल्फा और टॉक्सिक दोनों के उदाहरण यही बताते हैं कि अब सिर्फ स्केल से काम नहीं चलेगा — स्क्रिप्ट ही असली स्टार है।

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