शुक्रवार की दोपहर बाजपुर (ऊधमसिंह नगर) के खेतों पर आसमान अचानक टूट पड़ा। करीब 12 बजे शुरू हुई तेज ओलावृष्टि ने कुछ ही देर में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा दिया और खेतों में काम कर रहे किसान बेबस देखते रह गए। जब इसकी खबर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची, तो वे उस वक्त हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। इसके बाद जो हुआ, उसकी पूरे इलाके में चर्चा है। ओलावृष्टि (Dhami Bajpur Hailstorm) की खबर मिलते ही उन्होंने मौसम की परवाह किए बिना अपना हेलीकॉप्टर बीच रास्ते से बाजपुर की ओर मोड़ दिया।
दरअसल, हल्द्वानी से देहरादून की वापसी के दौरान ही मुख्यमंत्री को बाजपुर में हुई ओलावृष्टि और उससे फसलों को पहुंचे नुकसान की सूचना मिली थी। वक्त गंवाए बिना उन्होंने पायलट को रुख बदलने के निर्देश दे दिए। मौसम की खराबी ऐसे फैसलों में अक्सर रुकावट बनती है, लेकिन इस बार प्राथमिकता बिल्कुल साफ थी — पहले किसान, बाकी कार्यक्रम बाद में। किसी बड़े नेता का यूं बीच सफर से लौटकर खेतों की ओर रुख करना किसानों के लिए किसी संदेश से कम नहीं था।
पहले आसमान से लिया जायजा, फिर खेतों में उतरकर देखी बर्बादी
मौके पर पहुंचने का यह तरीका भी अपने आप में अलग रहा। सीधे जमीन पर उतरने से पहले मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से ही प्रभावित इलाकों का चक्कर लगाकर हवाई सर्वेक्षण किया। ऊपर से दिख रही बर्बाद फसलों की तस्वीर ने जमीन पर उतरकर की जाने वाली जांच की दिशा पहले ही तय कर दी थी। आसमान से हालात का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री बाजपुर में उतरे और सीधे प्रभावित खेतों की तरफ चल पड़े।
खेतों में पहुंचकर मुख्यमंत्री ने फसलों को हुए नुकसान को करीब से देखा और वहां मौजूद किसानों से एक-एक करके बात की। किसानों ने बताया कि ओले गिरने की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ समझ ही नहीं आया और महीनों की मेहनत की कमाई आंखों के सामने बर्बाद हो गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों की बात ध्यान से सुनी और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल घड़ी में वे अकेले नहीं हैं।
Dhami Bajpur Hailstorm: किसानों को मिला हरसंभव सहायता का भरोसा
हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मौके पर मौजूदगी से किसानों को यह भरोसा जरूर मिला कि उनकी आवाज ऊपर तक पहुंच चुकी है। सरकार उनकी तकलीफ को दूर से नहीं, बल्कि पास से देखना चाहती है — यही संदेश लेकर मुख्यमंत्री खेतों के बीच खड़े थे।
अधिकारियों को सख्त निर्देश, नुकसान के आकलन में देरी बर्दाश्त नहीं
निरीक्षण के दौरान ही मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को साफ निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का विस्तृत सर्वेक्षण करके नुकसान का आकलन प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि नियमानुसार राहत पहुंचाने की पूरी कार्रवाई तय समय के भीतर होनी चाहिए, ताकि किसान अगली फसल की तैयारी को लेकर अनिश्चितता में न रहे।
मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। आकलन से लेकर राहत तक, हर कदम पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ उठाया जाए। अब देखना यह है कि जमीनी अमला कितनी रफ्तार से इन निर्देशों को जमीन पर उतारता है।
फिलहाल बाजपुर के किसानों की निगाहें सरकारी सर्वे और आने वाली राहत पर टिकी हैं, जबकि मुख्यमंत्री की यह अचानक एंट्री इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। ओलावृष्टि ने फसलों को जो घाव दिए हैं, उन पर अब सरकारी मदद की मरहम की उम्मीद है और किसान यही देख रहे हैं कि आश्वासन कितनी जल्दी राहत में बदलता है।












