रुड़की। हरिद्वार जिले के पिरान कलियर क्षेत्र के धनोरी में सोमवार को बड़ा हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। यहां स्थित अमृत लॉ कॉलेज परिसर की एक इमारत का हिस्सा अचानक भरभराकर जमींदोज हो गया, और मलबे की चपेट में आकर प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) का एक जवान दब गया। Roorkee building collapse की इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन का रेस्क्यू अभियान युद्धस्तर पर जारी है, और मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं।
बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त कॉलेज परिसर में पीएसी की एक प्लाटून ठहरी हुई थी, जो विभिन्न ड्यूटी के सिलसिले में क्षेत्र में तैनात थी। इमारत का हिस्सा अचानक ढहा और धूल का गुबार उठते ही मौके पर मौजूद जवानों और कॉलेज स्टाफ को संभलने तक का मौका नहीं मिला। साथी जवानों ने तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचना दी और खुद ही मलबा हटाने की कोशिश शुरू कर दी।
दरअसल, पीएसी की टुकड़ियां कानून-व्यवस्था और विभिन्न आयोजनों के दौरान ड्यूटी के लिए अक्सर शिक्षण संस्थानों या सार्वजनिक परिसरों में ठहराई जाती हैं। ऐसे में वहां ठहरने वाले जवानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की ही बनती है, और यही वजह है कि इस हादसे ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाथरूम की तरफ बनी संरचना अचानक ढही
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कॉलेज परिसर के जिस हिस्से में हादसा हुआ, वहां बाथरूम की तरफ बनी संरचना कमजोर होने के चलते अचानक गिर गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, भवन का यह हिस्सा काफी समय से उपयोग में नहीं था और उसकी हालत जर्जर हो चली थी। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं — उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही हादसे का असली कारण सामने आएगा।
Roorkee building collapse: JCB से मलबा हटाने का काम जारी
घटना की सूचना मिलते ही पिरान कलियर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बिना एक पल गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। मलबे में दबे जवान को सुरक्षित निकालने के लिए जेसीबी और अन्य स्थानीय उपकरणों की मदद ली जा रही है, ताकि जल्द से जल्द मलबा हटाकर जवान तक पहुंचा जा सके।
मौके पर पुलिस के अलावा प्रशासनिक अमला भी मौजूद है और रेस्क्यू कार्य की निगरानी की जा रही है। बताया जा रहा है कि मलबा काफी मात्रा में है, इसलिए जवान को निकालने में वक्त लग सकता है। फिलहाल रेस्क्यू टीम का पूरा फोकस एक ही लक्ष्य पर है — दबे जवान को सुरक्षित बाहर निकालना।
जर्जर इमारतों और सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों और उन परिसरों में ठहरने वाले सुरक्षा बलों के आवासों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस बात की गहराई से जांच की जा रही है कि क्या यह भवन लंबे समय से जर्जर घोषित था या फिर इसका रखरखाव ठीक से नहीं हुआ था।
जैसे ही मलबा पूरी तरह हटाया जाएगा, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का आधिकारिक तौर पर खुलासा हो सकेगा। लेकिन तब तक धनोरी और आसपास के क्षेत्रों में चिंता का माहौल बना हुआ है, और लोग यही दुआ कर रहे हैं कि मलबे में दबा जवान सुरक्षित बाहर आ जाए।









