देहरादून। राजधानी के बीचोंबीच खड़ी ब्रिटिश काल की विरासतों को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है। चकराता रोड स्थित एलआईसी बिल्डिंग का एक हिस्सा पिछले महीने अचानक भरभराकर गिर गया था, और उसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। शुरुआती सर्वे में शहर के भीतर करीब 200 हेरिटेज साइटों की पहचान हुई है, जिनमें पुरानी वास्तुकला के बेजोड़ नमूने शामिल हैं।
दरअसल, देहरादून के विभिन्न हिस्सों में ब्रिटिश वास्तुकला की अमिट निशानियां आज भी मौजूद हैं। ऐसले हॉल, क्लॉक टावर, जामा मस्जिद, सीएनआई बॉयज इंटर कॉलेज और गुरु राम राय दरबार जैसे भवन अपनी कहानी खुद बयां करते हैं। लेकिन इनमें से कई इमारतें व्यावसायिक दबाव और समय पर मरम्मत न होने के कारण खस्ताहाल हो चुकी हैं।
एलआईसी बिल्डिंग हादसे से सीख
पिछले सितंबर में चकराता रोड स्थित एलआईसी बिल्डिंग — जिसे कनॉट प्लेस के नाम से भी जाना जाता है और जिसका निर्माण कार्य 1947 में पूरा हुआ था — का एक हिस्सा अचानक गिर गया। नीचे खड़ी कार और स्कूटी क्षतिग्रस्त हो गईं, हालांकि गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने इस इमारत को 2013 में ही गिरासू घोषित कर दिया था, लेकिन मालिक और किरायेदारों के बीच कानूनी दांव-पेंच के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी।
नगर निगम की ताजा रिपोर्ट में शहरभर के 21 अति-संवेदनशील और खतरनाक भवनों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से कई जगहों पर लोग आज भी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं।
200 हेरिटेज साइटों के संरक्षण की कार्ययोजना
बढ़ते खतरों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। ‘हिस्टोरिक सिटी सीरीज–2026’ पहल के तहत एनजीओ और हेरिटेज संगठनों को शहर की पुरानी विरासतों का विस्तृत दस्तावेजीकरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, अक्टूबर 2026 में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों से बहुमूल्य सुझाव लिए जाएंगे।
इन महत्वपूर्ण हेरिटेज साइटों को भविष्य की टाउन प्लानिंग प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि शहर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना उसे सुरक्षित रखा जा सके। जिला पर्यटन विकास अधिकारी को इन सभी चिन्हित स्थलों के संरक्षण के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिसे अंतिम अनुमोदन के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा।
फूंक-फूंक कर कदम रख रहा प्रशासन
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी भवन को गिरासू या असुरक्षित घोषित करने से पहले उसकी गहरी तकनीकी और संरचनात्मक जांच अनिवार्य होगी। एलआईसी बिल्डिंग जैसे मामलों से सबक लेते हुए स्थानीय प्रशासन अब बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
सभी उप जिलाधिकारियों और स्थानीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित रूप से खतरनाक इमारतों का प्राथमिकता के आधार पर सर्वे पूरा करने को कहा गया है, ताकि किसी भी बड़े हादसे को समय रहते टाला जा सके। उम्मीद जताई जा रही है कि दस्तावेजीकरण और DPR के बाद इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को स्थायी दिशा मिल सकेगी।









