देहरादून। पहाड़ के नौजवानों का बरसों पुराना ख्वाब अब हकीकत में बदलने लगा है। उत्तराखंड के 106 युवाओं ने विदेशी धरती पर नौकरी हासिल कर ली है, और सरकार का दावा है कि यह सिलसिला थमने वाला नहीं। दरअसल, राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना’ (Mukhyamantri Kaushal Unnayan Yojana) इन युवाओं को बिना दलालों के जाल में फंसे, सीधे वैश्विक नौकरी बाजार तक पहुंचा रही है।
असल में बात सिर्फ नौकरी दिलाने की नहीं है। इस योजना के तहत युवाओं को पहले विदेशी भाषाओं में पूरी तरह प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे वहां जाकर भाषा की दीवार से न टकराएं। सरकार ने जर्मन और जापानी भाषा सिखाने के लिए प्रदेशभर में 158 प्रशिक्षण केंद्र खोल रखे हैं, और जल्द ही उत्तरकाशी तथा टिहरी में भी ऐसे केंद्र शुरू होने जा रहे हैं।
विदेश रोजगार प्रकोष्ठ से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेश गए 106 युवाओं में से 75 जापान, 30 सऊदी अरब और एक युवा जर्मनी में काम कर रहा है। ये युवा हेल्थ, हॉस्पिटेलिटी और अन्य अहम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि विदेशी नियोक्ताओं की मांग को देखते हुए इन सेक्टरों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
जर्मन-जापानी भाषा के 158 केंद्र, पहाड़ से मैदान तक
मई 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर इस रोजगारपरक योजना को मंजूरी मिली थी। इसके क्रियान्वयन के लिए कौशल एवं सेवायोजन विभाग के तहत एक अलग ‘विदेश रोजगार प्रकोष्ठ’ भी बनाया गया है। फिलहाल देहरादून में जर्मन के 75 और जापानी के 45 केंद्र चल रहे हैं, जबकि अल्मोड़ा में जर्मन के 22 और बागेश्वर में जापानी के 16 केंद्र सुचारू रूप से संचालित हैं।
अभी देहरादून में जर्मनी के लिए चार बैच और जापान के लिए दो बैच में प्रशिक्षण चल रहा है। अल्मोड़ा में जर्मनी के लिए एक बैच और बागेश्वर में जापान के लिए एक बैच में भाषा सीखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर खास जोर है, क्योंकि विदेशी कंपनियां भाषा के साथ-साथ कार्य-संस्कृति को भी परखती हैं।
जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया में भी खुलेंगे रास्ते
सरकार सिर्फ जापान और जर्मनी तक सीमित नहीं रहना चाहती। हाल ही में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड आए जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम और जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान तीनों देशों में रोजगार की संभावनाओं और कुशल मानव संसाधन की जरूरतों पर खास चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब इन तीनों देशों की मांग के अनुसार उत्तराखंड के युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। धामी का कहना है कि यह योजना पूरी तरह सरकार की कसौटी पर खरी उतरी है, और इसी सफलता को देखते हुए भाषा प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों को इसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहाड़ से पलायन की समस्या के बीच विदेश में रोजगार का यह रास्ता कई परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है। अगर केंद्र बढ़ते रहे और प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रही, तो आने वाले समय में विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या और भी बड़ी हो सकती है।









