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Uttarakhand PMAY Gramin: 39,815 गरीब परिवारों को मिली पक्की छत, धामी सरकार ने जारी किए आंकड़े

On: October 8, 2026 5:51 PM
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

पहाड़ के गांवों में कच्चे मकानों में गुजर-बसर कर रहे हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (Uttarakhand PMAY Gramin) के तहत वर्ष 2022 के बाद से अब तक राज्यभर में 39,815 बेघर व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुरक्षित पक्की छत मिल चुकी है। मैदानी जिलों के साथ-साथ विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों में भी इस योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

धामी सरकार ने जो जिलेवार आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक ऊधमसिंह नगर 4,882 आवासों के निर्माण के साथ राज्य में शीर्ष पायदान पर है। इसके ठीक बाद हरिद्वार में 4,493 परिवारों को अपने घर की चाबी मिली है। कठिन भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद रुद्रप्रयाग में 4,032, चमोली में 3,900 और सीमांत पिथौरागढ़ में 3,386 घर बनकर तैयार हुए हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में पक्का घर सिर्फ छत नहीं, बल्कि सुरक्षा का सवाल भी है। बरसात और सर्दियों में कच्चे मकान अक्सर भूस्खलन और पानी रिसने की समस्या झेलते हैं। ऐसे में कंक्रीट की छत वाले घर का मतलब है — बाढ़, बारिश और भूस्खलन के खतरे से अपेक्षाकृत सुरक्षित जीवन।

Uttarakhand PMAY Gramin: छत ही नहीं, सुविधाओं का पूरा पैकेज

केंद्र और राज्य सरकार की इस संयुक्त पहल में लाभार्थी को अकेले नहीं छोड़ा जा रहा। घर निर्माण के लिए 1.30 लाख रुपये की सीधी आर्थिक मदद डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए किस्तों में दी जा रही है। इसके अलावा, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये मनरेगा और स्वजल के संयोजन से मिलते हैं।

ग्रामीणों के जीवनस्तर को संवारने के लिए आवास के साथ 95 दिन की अकुशल मजदूरी का भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है। वहीं, राज्य सरकार ने अपनी तरफ से किचन सामग्री और बर्तनों की खरीद के लिए मिलने वाली सहायता राशि को 5,000 से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दिया है। हर आवास को ‘जल जीवन मिशन’ से नल कनेक्शन, ‘सौभाग्य’ योजना से बिजली और ‘उज्ज्वला योजना’ से रसोई गैस सिलेंडर से भी अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है।

पर्वतीय जिलों में निर्माण पर खास जोर

पौड़ी गढ़वाल में 3,195, उत्तरकाशी में 3,057, देहरादून में 2,839, चंपावत में 2,789, बागेश्वर में 2,279, टिहरी गढ़वाल में 2,134, नैनीताल में 1,480 और अल्मोड़ा में 1,349 आवास बनाए गए हैं। यानी मैदान के साथ-साथ पहाड़ के दुर्गम इलाकों में भी पक्की छत का सिलसिला थमा नहीं है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड इससे पहले पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन का पुरस्कार भी हासिल कर चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित आवेदनों के भौतिक सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया में कोई ढिलाई न बरती जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार झेलने वाले हर पात्र परिवार को समय पर पक्की छत मिल सके।

आंकड़ों से साफ है कि योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही। डीबीटी के जरिए सीधी मदद, शौचालय-बिजली-पानी-गैस का अनिवार्य पैकेज और राज्य सरकार की बढ़ाई गई किचन सहायता — यह सब मिलकर ग्रामीण परिवारों के जीवनस्तर को ऊपर उठा रहा है। आने वाले महीनों में लंबित आवेदनों का भौतिक सत्यापन पूरा होते ही यह संख्या और बढ़ेगी, यही सरकार का दावा है।

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