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हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

Uttarakhand Earthquake Siren: हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा सायरन, शासन का आदेश जारी

On: October 8, 2026 5:51 PM
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

उत्तराखंड में रहने वालों के लिए एक जरूरी खबर है। अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह ठीक 11 बजे पूरे राज्य में भूकंप का सायरन बजेगा। घबराने की कोई बात नहीं — यह असली खतरे का संकेत नहीं, बल्कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (Uttarakhand Earthquake Siren Test) का मासिक परीक्षण होगा। राज्य शासन ने इसके लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

इस रूटीन टेस्टिंग के दो बड़े मकसद हैं। पहला — फील्ड में लगे सायरन और सेंसर ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी नियमित जांच। दूसरा — आम लोगों को सायरन की आवाज से इस कदर परिचित करा देना कि वास्तविक संकट के समय कोई भगदड़ या असमंजस की स्थिति पैदा न हो।

Uttarakhand Earthquake Siren Test: 169 सेंसर और 112 सायरन की मासिक परीक्षा

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और आईआईटी रुड़की द्वारा संयुक्त रूप से संचालित अर्ली वार्निंग सिस्टम की समीक्षा के बाद यह निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य के संवेदनशील हिस्सों में 169 सिस्मिक सेंसर और 112 हूटर-सायरन सक्रिय हैं।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड का बड़ा भूभाग भूकंपीय संवेदनशीलता के लिहाज से जोन 4 और जोन 5 में आता है। ऐसे में भूकंपीय तरंगें पहुंचने से चंद सेकंड पहले मिलने वाला संदेश भी जनहानि रोकने में निर्णायक साबित होता है। शासन ने आवश्यकतानुसार नए ‘डार्क स्पॉट्स’ पर अतिरिक्त सेंसर और हूटर लगाने का प्रस्ताव भी आगे बढ़ा दिया है।

चमोली की घटना ने साबित की सिस्टम की अहमियत

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, 6 अक्टूबर की रात चमोली के थराली क्षेत्र में आए 4.9 तीव्रता के झटकों के दौरान इस सिस्टम ने जमीन हिलने से ठीक पहले प्रारंभिक संकेत दर्ज किए थे। आईआईटी रुड़की के सहयोग से विकसित इस नेटवर्क ने भूकंपीय तरंगों के प्रसार से पहले ही ‘भूदेव’ ऐप और सायरन के माध्यम से सिग्नल प्रसारित कर दिया था।

दरअसल, वैज्ञानिक आधार पर भूकंप आने पर प्राथमिक तरंगों (P-waves) और घातक द्वितीयक तरंगों (S-waves) के बीच कुछ सेकंड का फासला होता है। यह अंतराल भले ही बेहद छोटा हो, लेकिन इसमें लोग खुले स्थान की ओर भाग सकते हैं, बहुमंजिला इमारतों में गैस की मुख्य लाइनें बंद की जा सकती हैं और लिफ्ट का संचालन रोका जा सकता है। यानी चंद सेकंड भी जान बचा सकते हैं।

मोबाइल पर आएगा मॉक वाइब्रेशन, लोकेशन ‘ऑन’ रखने की अपील

सायरन के साथ ही 9 तारीख को सुबह 11 बजे ‘भूदेव’ मोबाइल एप्लिकेशन पर भी मॉक वाइब्रेशन और बीप अलर्ट भेजा जाएगा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय अपने परिजनों, बच्चों और बुजुर्गों को इस अभ्यास से पहले ही अवगत करा दें।

बेहतर सटीकता और समय पर चेतावनी पाने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपने स्मार्टफोन में ‘भूदेव’ और ‘सचेत’ ऐप को अपडेट रखना चाहिए और लोकेशन परमिशन हमेशा ‘ऑन’ रखनी चाहिए। पहाड़ी राज्य में जहां आपदा कभी दस्तक नहीं देती, वहां ऐसी तैयारी ही असली सुरक्षा कवच है। याद रहे — 9 तारीख को सायरन सुनकर घबराएं नहीं, यह आपकी सुरक्षा के लिए ही बज रहा है।

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