देहरादून। विषम आपदाओं, अप्रत्याशित हादसों या मानवीय संकट के क्षणों में अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद करने वाले बच्चों को उत्तराखंड सरकार सम्मानित करने जा रही है। मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता योजना (Uttarakhand Bal Veerta Puraskar) के तहत वर्ष 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया तेज कर दी गई है, और आवेदन का पोर्टल 10 अक्टूबर तक खुला रहेगा।
राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के सभी तेरह जनपदों में पात्र छात्र-छात्राओं की पहचान कर उनके दस्तावेज जुटाने का काम शुरू हो चुका है। प्रशासनिक रूपरेखा के तहत राज्य के प्रत्येक जनपद से अनिवार्य रूप से एक साहसी बालक या बालिका को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना जाएगा। यानी राज्य के कोने-कोने से जांबाज बच्चों को इस मंच पर आने का मौका मिलेगा।
कौन कर सकता है आवेदन? जानें पात्रता
जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार के मुताबिक, यह योजना केवल शारीरिक पराक्रम तक सीमित नहीं है। अगर किसी बच्चे ने किसी डूबते हुए को बचाया हो, आगजनी जैसी आपात स्थिति में धैर्य दिखाया हो या फिर गंभीर मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए किसी की रक्षा की हो, तो वह इस पुरस्कार का सीधा हकदार बनता है।
दरअसल, कई बार छोटे बच्चे बड़े हादसों में अद्भुत साहस दिखा जाते हैं, लेकिन उनकी बहादुरी की कहानी सामने नहीं आ पाती। इसी खामी को दूर करने के लिए सरकार ने स्कूल स्तर पर ही ऐसे बच्चों की पहचान का जिम्मा तय किया है, ताकि कोई भी नन्हा हीरो सम्मान से वंचित न रहे।
बताया जा रहा है कि आवेदन मिलने के बाद जिला स्तर पर गठित समिति हर मामले की गहन जांच करेगी और उसके बाद ही अंतिम नाम शासन को भेजे जाएंगे। यानी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को सबसे ज्यादा तरजीह दी गई है, ताकि वाकई हकदार बच्चे ही इस सम्मान तक पहुंच सकें।
Uttarakhand Bal Veerta Puraskar के लिए ऐसे करें आवेदन
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने पूरी आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी और पेपरलेस रखा है। सभी सरकारी, सहायता प्राप्त व निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों से अपील की गई है कि वे अपने संस्थानों में ऐसे साहसी बच्चों के वाकयों की पड़ताल करें।
पात्र बच्चों का पूरा विवरण आधिकारिक विभागीय पोर्टल wecd.uk.gov.in पर समय रहते अपलोड कराना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय घटना का संक्षिप्त विवरण, संबंधित स्थानीय पुलिस या प्रत्यक्षदर्शी का सत्यापन और आयु प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज संलग्न करने अनिवार्य होंगे। इसके बाद जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच कर अंतिम नाम शासन को भेजेगी।
अभिभावकों और स्कूलों के लिए जरूरी बातें
अगर आपके आसपास कोई ऐसा बच्चा है जिसने बहादुरी का परिचय दिया है, तो देर न करें। स्कूल प्रबंधन से संपर्क कर उसका विवरण पोर्टल पर दर्ज कराएं। ध्यान रहे कि घटना का विवरण तथ्यों पर आधारित हो और पुलिस या प्रत्यक्षदर्शी का सत्यापन जरूर संलग्न हो।
बहरहाल, समय सीमा बेहद सीमित है — इच्छुक अभिभावक और संबंधित संस्थान 10 अक्टूबर, 2026 तक ही अपना आवेदन डिजिटल माध्यम से जमा कर सकते हैं। गौरतलब है कि यह सम्मान न सिर्फ बच्चों का हौसला बढ़ाएगा, बल्कि समाज में साहस और मानवता की भावना को भी प्रोत्साहित करेगा।









