मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

Mahendra Bhatt का Congress पर हमला: SIR और चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाना गैर-जिम्मेदाराना, बोले- हार से हताश है विपक्ष

On: October 7, 2026 8:10 PM
Follow Us:
---Advertisement---
वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

देहरादून। चुनावी नतीजों में लगातार मिल रहे झटकों के बाद कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने पर उतर आई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट (Mahendra Bhatt) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी हंगामे पर कड़ा ऐतराज जताया है।

भट्ट ने दो टूक कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को संदेह के घेरे में खड़ा करके देश की अंतरराष्ट्रीय साख पर बट्टा लगाने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, आगामी केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव और निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच विपक्षी दल मतदाता सूची सत्यापन को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। भाजपा के अनुसार, हार की आशंका से घिरी कांग्रेस अब पहले से बहाने तलाशने में जुटी है।

संवैधानिक संस्थाओं की साख पर वार का आरोप

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने विपक्षी रणनीति को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। महेंद्र भट्ट ने कहा कि पहले आकाशवाणी और फिर जंतर-मंतर तथा हरिद्वार में हुए विरोध प्रदर्शनों का एकमात्र मकसद माहौल खराब करना है।

उनका कहना था कि जब जनादेश पक्ष में नहीं आता, तब कांग्रेस कभी ईवीएम पर सवाल उठाती है तो कभी निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को चुनौती देती है। बताया जा रहा है कि हरिद्वार और राजधानी देहरादून के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। असल में, संस्थाओं की साख गिराकर राजनीतिक जमीन तलाशने का यह तरीका बेहद खतरनाक है।

क्या है SIR प्रक्रिया, जिसे लेकर मचा है बवाल

दरअसल, SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग की एक प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूचियों से फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं और छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। भाजपा का कहना है कि यह एक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया है, लेकिन कांग्रेस इसे लेकर सियासी माहौल बनाने में जुटी है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने हाल ही में देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि SIR प्रक्रिया में उत्तराखंड के 13.89 लाख मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए हैं। पार्टी ने इसे मतदाताओं को परेशान करने का सुनियोजित षड्यंत्र तक करार दिया था। ऐसे में केदारनाथ उपचुनाव से पहले यह मुद्दा देवभूमि की सियासत में और गरमाने के आसार हैं।

Mahendra Bhatt बोले- जनता पहचान चुकी है हथकंडे

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता अब इन राजनीतिक हथकंडों को भली-भांति पहचान चुकी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास योजनाओं का असर जमीन पर दिख रहा है और मतदाता विकास के साथ खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान नहीं किया, तो जनता उसे पूरी तरह किनारे कर देगी।

बहरहाल, उत्तराखंड की देवभूमि में हार से बचने के लिए गढ़े जा रहे ये नए तर्क किसी काम नहीं आने वाले हैं — कम से कम भाजपा नेतृत्व का तो यही मानना है। केदारनाथ उपचुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है, और आने वाले दिनों में मतदाता सूची का यह मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में रहने वाला है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment