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अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिकता से जोड़ने का संकल्प: 26 मदरसों को मिले मान्यता प्रमाण-पत्र

On: September 2, 2026 9:47 PM
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देहरादून: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा को मुख्यधारा और आधुनिकता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को औपचारिक मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। देहरादून के आईआरडीटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम का स्पष्ट संदेश था कि पारंपरिक शिक्षा अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन नई पीढ़ी के हाथों में विज्ञान, तकनीक और नवाचार की समझ होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से आयोजित समारोह की थीम “नई पहचान, नया सम्मान। आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य।” रखी गई थी। मुख्यमंत्री ने मान्यता पाने वाले संस्थानों के प्रबंधकों और शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि यह पहल केवल प्रमाण-पत्र बांटने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका असर कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों की सोच और कौशल में दिखना चाहिए।

परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नए वैज्ञानिक अनुसंधानों के युग में केवल किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक या वैज्ञानिक बनें, इसके लिए जरूरी है कि उन्हें शुरुआती दौर से ही गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा मिले।

अपनी बात को सरल अंदाज में समझाते हुए सीएम ने कृषि का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और आज भी अवसर मिलने पर खेत में काम करने से नहीं झिझकते। पहले हल से खेती होती थी, आज आधुनिक मशीनों से काम आसान और बेहतर हुआ है, ठीक उसी तरह पढ़ाई के तरीकों को भी समय के साथ बदलना होगा। उन्होंने कहा कि 14-15 साल के बच्चे आज डिजिटल उपकरणों को बड़ों से बेहतर समझते हैं, इसलिए उन्हें सही दिशा और अच्छे संस्कार देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

नीतियों का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं: सीएम

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सरकार के फैसलों पर उठ रहे सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार की किसी भी नीति का मकसद किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। समान नागरिक संहिता और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि नियमों के दायरे में व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं। यदि किसी के पास वैध रजिस्ट्री, दस्तावेज और स्वीकृत नक्शा है तो उसे अनावश्यक परेशान करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मुस्लिम देशों में भी यूसीसी की व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है। आजादी के बाद लंबे समय तक कुछ वर्गों को सिर्फ राजनीतिक समर्थन के लिए इस्तेमाल किया गया और वे बुनियादी अवसरों से वंचित रहे, लेकिन अब सोच को सकारात्मक विकास की दिशा में मोड़ना होगा।

इन संस्थानों को मिली मान्यता

प्राधिकरण की जांच-पड़ताल के बाद कुल 26 संस्थानों को मान्यता दी गई है। देहरादून जनपद के विकासनगर और सहसपुर क्षेत्र के जामिया इस्लामिया (डॉटरगंज), जामिया दारूल उलूम रमजानिया (ढकरानी), जामिया सबीलुर्रशाद (उस्मानपुर), जामिया सय्यिदा फातिमातुज्जाहरा (सहसपुर), जामिया रहीमिया प्राईमरी स्कूल (जाटोवाला) और मदरसा अरबिया तालीमुल कुरआन (लक्खनवाला) शामिल हैं।

हरिद्वार जनपद के रुड़की, लक्सर, बहादराबाद और भगवानपुर क्षेत्र के मदरसा इमामिया, मदरसा अरबिया रहमानिया, पैरामाउन्ट कॉन्वेन्ट, गोल्डन फ्युचर, मदरसा तमन्ना-ए-तालीम, मदरसा गुलशन-ए-तालीम, मदरसा जन्नतुन निशा, मदरसा नुर साबरी, के. जी. एन. पब्लिक स्कूल, मदरसा रशीदिया, एम. टी. यू. स्कूल, मदरसा बहार-ए-चमन, एम. आई. टी. स्कूल, मदरसा तालीम-ए-जदीद, मॉर्डन आदर्श पब्लिक स्कूल, मदरसा फैज-ए-हिदायत, आरजू पब्लिक स्कूल, ड्रीम पैराडाइज और राव असगर अली मैमोरियल पब्लिक स्कूल को मान्यता मिली। ऊधमसिंहनगर जनपद के केलाखेड़ा स्थित एम. जी. एन. पब्लिक स्कूल को नवीन मान्यता प्रदान की गई।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, उपाध्यक्ष फरजाना, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और अपर सचिव विक्रम सिंह यादव समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। अंत में सीएम ने भरोसा दिलाया कि सरकार हरसंभव सहयोग को तैयार है, लेकिन वास्तविक बदलाव तभी दिखेगा जब संस्थान भी पूरी जिम्मेदारी से बच्चों को आधुनिक दुनिया के लिए तैयार करेंगे।

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