देहरादून। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड सचिवालय परिसर में ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राष्ट्रध्वज फहराया और समस्त प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, उत्तराखंड पुलिस, पीएसी के जवानों तथा स्कूली छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। उन्होंने देश की स्वतंत्रता हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
आजादी विरासत में मिली, राष्ट्र निर्माण आज की जिम्मेदारी
मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उन असंख्य वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान के स्मरण का अवसर है, जिनके संघर्ष से भारत आज स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता हमें विरासत में प्राप्त हुई है, परंतु समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की वास्तविक जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी के कंधों पर है। आज का भारत आत्मविश्वास से परिपूर्ण है—देश ने आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। अंतरिक्ष में भारतीय वैज्ञानिक नए कीर्तिमान रच रहे हैं, युवा वैश्विक मंचों पर प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और डिजिटल तकनीक ने शासन की तस्वीर बदल दी है। अब लक्ष्य ऐसा विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान अवसर मिले और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
25 वर्षों की उपलब्धियां और आगे की चुनौतियां
उत्तराखंड के गठन के 25 वर्षों का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह आत्ममंथन और भविष्य की दिशा निर्धारित करने का समय है। राज्य का गठन केवल प्रशासनिक परिवर्तन नहीं था, इसके पीछे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं और जनाकांक्षाओं का दीर्घ संघर्ष था। इन 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने, युवाओं हेतु रोजगार सृजन, दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य-शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जल स्रोतों के संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी चुनौतियों पर निरंतर कार्य की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और हमारा मूलमंत्र ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखंड’ होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित उत्तराखंड का अर्थ केवल बड़ी इमारतें या विशाल परियोजनाएं नहीं हैं—वास्तविक विकसित उत्तराखंड वह होगा जहां पहाड़ का युवा गांव में रहकर सम्मानजनक रोजगार पाए, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर नागरिक को समय पर बेहतर उपचार मिले।
‘आउटकम डिलीवरी’ पर जोर, आधुनिक तकनीक का उपयोग
सचिवालय को राज्य शासन का मस्तिष्क बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यहां का प्रत्येक निर्णय दूर-दराज के गांवों तक प्रभाव डालता है, अतः प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि सरकार का हर फैसला आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने अधिकारियों से ‘फाइल डिस्पोजल’ से आगे बढ़कर ‘आउटकम डिलीवरी’ यानी परिणामोन्मुखी कार्यशैली अपनाने का आह्वान किया। ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत के तहत उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और डेटा एनालिटिक्स के अधिकतम उपयोग पर बल दिया तथा अधिकारियों से स्वयं को सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि सच्चा लोक सेवक मानकर जनता की समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान करने को कहा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था, हिमालय-संवेदनशील विकास और जिम्मेदार पर्यटन
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति इसके गांव, महिलाएं, युवा और समृद्ध प्राकृतिक संसाधन हैं। मिलेट्स (श्री अन्न), स्थानीय कृषि उत्पादों, बागवानी, जड़ी-बूटियों, हस्तशिल्प और जैविक खेती को आधुनिक वैश्विक बाजारों से जोड़ना होगा। महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना करते हुए उन्होंने इन्हें ग्रामीण उद्यमिता का केंद्र बनाने पर जोर दिया। युवाओं के लिए लक्ष्य होना चाहिए कि उत्तराखंड का युवा केवल नौकरी मांगने वाला न रहे, बल्कि नौकरी देने वाला बने—स्टार्टअप, आईटी, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और क्रिएटिव इकोनॉमी में अवसर सृजित हों ताकि रोजगार के लिए युवाओं को देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ या बेंगलुरु न जाना पड़े। पर्यावरण पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हिमालय का प्रहरी है और यहां का विकास ‘हिमालय-संवेदनशील विकास मॉडल’ पर आधारित होना चाहिए, जिसमें आपदा पूर्व तैयारी, अर्ली वार्निंग सिस्टम और आपदा-रोधी निर्माण को प्राथमिकता मिले। पर्यटन में संख्या बढ़ाने के बजाय जिम्मेदार, टिकाऊ और ‘हाई-वैल्यू टूरिज्म’ पर ध्यान देना होगा तथा चारधाम यात्रा के साथ छोटे गांवों, लोक संस्कृति, योग-वेलनेस, एडवेंचर, इको-टूरिज्म और होमस्टे को मुख्यधारा से जोड़ना होगा। अंत में उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों-कर्मचारियों से कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता के साथ प्रदेश के विकास में शत-प्रतिशत योगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया।









