मानसून की विदाई की बेला में कुमाऊं मंडल में हुई अतिभारी वर्षा ने एक दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बीते दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते महज 24 घंटों के भीतर मंडल के छह जिलों में 575 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरस चुका है। इससे पहले वर्ष 2016 में सितंबर के आखिरी सप्ताह में करीब 550 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा था।
हल्द्वानी से प्राप्त सूचना के अनुसार लगातार वर्षा के साथ तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। सुबह और शाम के समय ठंड का एहसास स्पष्ट रूप से बढ़ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय बने रहने से आने वाले दिनों में भी शीतल हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है, यानी पर्वतीय क्षेत्रों में जाड़े की आहट सुनाई देने लगी है।
किस जिले में कितनी बारिश दर्ज हुई
मौसम विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में कुमाऊं के छह जिलों में जोरदार बारिश हुई है। पिथौरागढ़ में 70 मिमी, चम्पावत में 87 मिमी, अल्मोड़ा में 91 मिमी, बागेश्वर में 62 मिमी, ऊधमसिंह नगर में 147 मिमी और नैनीताल में 118 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. ए.एस. नैन के अनुसार मंडल के छह जिलों में 24 घंटे के अंदर 575 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो चुकी है। इन आंकड़ों से साफ है कि मानसून ने जाते-जाते अपनी पूरी ताकत दिखा दी।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। पहाड़ी मार्गों पर आवागमन में परेशानी हो रही है और निचले इलाकों में जलभराव की सूचनाएं भी मिली हैं। हालांकि अब तक किसी बड़ी क्षति की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
तापमान लुढ़का, अगले तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट
निरंतर बारिश के कारण कुमाऊं के तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। सुबह-शाम ठिठुरन बढ़ने से लोगों ने गर्म वस्त्र निकालने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून की पूर्ण विदाई के बाद तापमान में और तेजी से कमी आएगी और पहाड़ों में शीत ऋतु की शुरुआत मानी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से अगले तीन दिनों तक भारी वर्षा की चेतावनी जारी है, यानी तत्काल राहत की उम्मीद कम है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में उत्तराखंड से मानसून पूरी तरह विदा हो सकता है।
बदला मानसून का मिजाज, किसानों और पर्यटकों के लिए सलाह
सितंबर के अंत में इतनी भारी बारिश से स्पष्ट है कि इस वर्ष मानसून का व्यवहार पूरी तरह बदला रहा। जहां जुलाई-अगस्त में सामान्य से कम वर्षा की शिकायत थी, वहीं सितंबर के अंतिम दिनों में बादल इस कदर बरसे कि दस वर्ष पुराना रिकॉर्ड टूट गया। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के चलते बारिश और तापमान से जुड़े कई नए रिकॉर्ड बनने की संभावना है।
किसानों के लिए यह बारिश दोधारी तलवार जैसी है — एक ओर खेतों को पानी मिला है, वहीं तैयार फसलों को नुकसान का खतरा भी है। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि अगले कुछ दिनों में पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा से पहले मौसम की ताजा जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।









