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रक्षाबंधन पर महिलाओं को धामी सरकार का तोहफा: 60 की उम्र से मुफ्त बस यात्रा, स्वरोजगार लोन सीमा बढ़ी

On: August 28, 2026 10:47 PM
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वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने रक्षाबंधन पर्व पर प्रदेश की महिलाओं के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं। उधमसिंह नगर जिले के चकरपुर स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ्त करने से लेकर स्वरोजगार के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने तक कई अहम घोषणाएं कीं। इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन और आर्थिक स्वावलंबन को मजबूत करना है।

60 साल की उम्र से रोडवेज में मुफ्त सफर, देहरादून में चलेंगी 10 पिंक ई-बसें

प्रदेश में अब तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए 65 वर्ष की आयु से रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा का नियम लागू था। मुख्यमंत्री धामी ने इसमें बदलाव करते हुए घोषणा की कि महिलाओं के लिए यह छूट अब 60 साल की उम्र से ही लागू होगी। इस निर्णय से राज्य की हजारों बुजुर्ग महिलाओं को तीर्थ स्थानों, अस्पतालों या रिश्तेदारों के यहां आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी।

इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के अनुकूल बनाने के लिए देहरादून में 10 विशेष पिंक ई-बस चलाने का फैसला किया गया है। केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना’ के तहत उत्तराखंड को कुल 137 इलेक्ट्रिक बसें मिल रही हैं, जिनमें से 100 बसें राजधानी देहरादून में चलनी हैं। इन्हीं 100 बसों में से 10 बसों को पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित पिंक बस के रूप में संचालित किया जाएगा। बाद में इस सेवा का विस्तार हरिद्वार, हल्द्वानी और उधमसिंह नगर जैसे अन्य बड़े शहरों में भी किया जाएगा।

स्वरोजगार लोन की सीमा 2.50 लाख हुई, ब्याज मुक्त सहायता जारी

उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया है। ‘महिला स्वरोजगार योजना’ के तहत दिए जाने वाले रियायती बैंक ऋण की अधिकतम सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल रोजगार मांगने वाला बनाने के बजाय दूसरों को रोजगार देने लायक बनाना है। इस दिशा में राज्य के स्वयं सहायता समूहों को पहले से ही 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जा रहा है।

पहाड़ी जिलों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक फैले इन समूहों को बाजार से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ भी चलाई जा रही है। महिला उद्यमियों के उत्पादों की बिक्री आसान बनाने के लिए देहरादून में प्रदेश के सभी 13 जिलों के पारंपरिक और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए 13 बिक्री केंद्र खोले जाएंगे।

हाईटेक टॉयलेट और लखपति दीदी से करोड़पति दीदी का लक्ष्य

मातृशक्ति की गरिमा और निजता की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार प्रदेशभर में आधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित करेगी। प्रमुख बाजारों, बस अड्डों, राष्ट्रीय राजमार्गों और चारधाम यात्रा मार्ग के पर्यटन स्थलों पर आधुनिक हाईटेक टॉयलेट बनाए जाएंगे। इन परिसरों में स्वच्छता, वेंटिलेशन, आपातकालीन अलार्म और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पहाड़ी इलाकों में महिला यात्रियों और महिला व्यापारियों को अक्सर बुनियादी शौचालय सुविधाओं की कमी झेलनी पड़ती थी, जिसे यह पहल दूर करेगी।

चकरपुर में बहनों से राखी बंधवाते हुए मुख्यमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि बहनों से मिला स्नेह ही उन्हें दिन-रात जनता की सेवा की ऊर्जा देता है। महिला सशक्तिकरण अभियानों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की 3 लाख 9 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बहनों ने विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद शानदार काम किया है और अब लक्ष्य उन्हें लखपति दीदी से आगे बढ़ाकर करोड़पति दीदी बनाना है।

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता को कानून के रूप में पारित किया है, जिसमें महिलाओं को संपत्ति और विवाह से जुड़े मामलों में समान अधिकार दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार मिला है। बेटियों की शिक्षा और जन्म पर आर्थिक मदद देने वाली ‘नंदा गौरा योजना’ के तहत बेटी के जन्म पर 11,000 रुपये और 12वीं की परीक्षा पास करने पर 51,000 रुपये दिए जाते हैं। समारोह में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति समेत भारी संख्या में स्थानीय महिलाएं मौजूद रहीं।

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