उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पर्यावरण और जनता की सहूलियत को लेकर एक बहुत बड़ी हाई-लेवल बैठक की है। मुख्यमंत्री आवास में हुई इस मैराथन समीक्षा बैठक में सीएम धामी ने वनाग्नि (जंगलों की आग), पीने के पानी की किल्लत, स्वास्थ्य सेवाओं और आने वाले मानसून की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की क्लास लगाई। सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की देवतुल्य जनता को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और जो भी अधिकारी लापरवाही बरतेगा, उस पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
जंगलों की आग बुझाने के लिए 1 घंटे का अल्टीमेटम और 1000 नई नौकरियां
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने साफ कहा कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। आग पर काबू पाने के लिए सीएम ने अधिकारियों को ‘रिस्पॉन्स टाइम’ कम से कम रखने का निर्देश दिया है। नए आदेश के मुताबिक, वनाग्नि की सूचना मिलने के ठीक एक घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी को हर हाल में मौके पर पहुंचना होगा।
वनों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने फॉरेस्ट गार्ड (Forest Guard) की कमी को दूर करने के लिए तत्काल 1000 नए पदों पर नियुक्तियां करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जंगलों की आग पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए पूरे प्रदेश में अलमोड़ा का मशहूर ‘शीतलखेत मॉडल’ लागू करने पर जोर दिया गया है। फायर लाइन के आसपास छोटी-छोटी तलैया (पानी के गड्ढे) बनाई जाएंगी और स्थानीय ग्राम समितियों व वन पंचायतों को आग रोकने के लिए पर्याप्त बजट दिया जाएगा। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए अब वन विभाग के हर डिवीजन में पशु चिकित्सकों की तैनाती भी अनिवार्य कर दी गई है।
गर्मियों में न बिजली कटेगी, न पानी की होगी किल्लत: सीएम का कड़ा रुख
भीषण गर्मी के इस मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल और बिजली की आपूर्ति को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी भी कोने में पीने के पानी की किल्लत नहीं होनी चाहिए। जहां जरूरत हो, वहां पानी के टैंकरों की पूरी व्यवस्था रखी जाए और टूटी हुई पाइपलाइनों को तुरंत ठीक किया जाए।
सीएम धामी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि मैदानी इलाकों के साथ-साथ चारधाम यात्रा रूट, पर्यटन स्थलों और तीर्थ स्थलों पर पानी की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। बिजली विभाग को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं भी अघोषित बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए और राज्य में ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएं।
मानसून को लेकर प्रभारी सचिवों को मिला टास्क, अस्पतालों का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट
आने वाले मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए सीएम धामी ने अभी से कमर कस ली है। उन्होंने सभी जनपदों के प्रभारी सचिवों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में जाकर जमीन पर चल रही तैयारियों का खुद स्थलीय निरीक्षण करें। पहाड़ी रास्तों और भूस्खलन वाले संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने देश के अन्य राज्यों के अस्पतालों में हुई आगजनी की घटनाओं से सबक लेते हुए उत्तराखंड के सभी अस्पतालों का अनिवार्य रूप से ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ कराने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए मानसून के दौरान उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एक पुख्ता इमरजेंसी सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सकुशल यात्रा कराना राज्य सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो श्रद्धालु स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग टेस्ट) में अनफिट पाए जा रहे हैं, उन्हें आगे की यात्रा न करने के लिए प्यार से समझाया और प्रेरित किया जाए ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा और सचिव सचिन कुर्वे सहित शासन के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे।
