उत्तराखंड के सियासी पारे में रविवार को उस वक्त जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार पर सीधा और तीखा जुबानी हमला बोला। रुद्रपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए खड़गे ने साफ शब्दों में कहा कि उनका यह दौरा कोई सैर-सपाटा या पर्यटन नहीं है, बल्कि प्रदेश की जनता के हक की लड़ाई लड़ने और संगठन में नई जान फूंकने का अभियान है। मुख्यमंत्री की टिप्पणियों का जवाब देते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि वे यहां बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का रास्ता साफ करने आए हैं।
दरअसल, रुद्रपुर में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम के दौरान खड़गे के तेवर पूरी तरह आक्रामक नजर आए। उन्होंने न सिर्फ राज्य सरकार की नाकामियों को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि देश की पुरानी राजनीतिक परंपराओं और मर्यादाओं की याद भी दिलाई। कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में आगामी सियासी समीकरणों को लेकर सरगर्मी तेज है।
‘मैंने पूरी दुनिया घूमी है, मुझे टूरिज्म की जरूरत नहीं’
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा उनके दौरे पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए खड़गे ने कहा कि उनसे पूछा जा रहा है कि वे उत्तराखंड क्यों आए हैं और क्या वे यहां छुट्टियां बिताने आए हैं? इस पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने पूरी दुनिया का टूर किया है, पूरे हिंदुस्तान का टूर किया है। मैं यहां टूरिज्म के लिए नहीं आया हूं। मैं अपने लोगों के लिए आया हूं, अपनी जनता के लिए आया हूं, छात्रों के हक के लिए आया हूं, कांग्रेस पार्टी को ज़िंदा रखने के लिए आया हूं और बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए आया हूं।”
खड़गे का यह बयान सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला था। वहां मौजूद भीड़ ने तालियों के साथ उनके इस बयान का स्वागत किया। बताया जा रहा है कि खड़गे के इस तेवर से साफ है कि कांग्रेस अब उत्तराखंड में फ्रंट फुट पर खेलकर चुनावी बिसात बिछाने के मूड में है।
अटल-आडवाणी का जिक्र कर सिखाई राजनीतिक मर्यादा
अपने संबोधन में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिर्फ आक्रामक राजनीति ही नहीं की, बल्कि देश की राजनीतिक संस्कृति पर भी बात की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की परंपरा हमेशा से वरिष्ठ नेताओं और विपक्ष का सम्मान करने की रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि जब अटल जी और आडवाणी जी विपक्ष में रहते हुए कर्नाटक जाते थे, तो कांग्रेस के नेता न सिर्फ उनका स्वागत करते थे, बल्कि उनके रहने और खाने की सम्मानजनक व्यवस्था भी करते थे। खड़गे ने कहा कि वैचारिक और राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में अपने से वरिष्ठ और बुजुर्ग नेताओं का सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान
भाषण के अंतिम हिस्से में कांग्रेस अध्यक्ष ने सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद साधा। उन्होंने कहा कि केवल मंचों से भाषण देने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि इसके लिए धरातल पर उतरकर काम करना होगा। खड़गे ने कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर जनता के असली मुद्दों—जैसे बेरोजगारी, महंगाई और छात्रों की समस्याओं—पर सड़क पर उतरने का निर्देश दिया।
स्थानीय नेताओं के अनुसार, खड़गे का यह दौरा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि इसने राज्य में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय करने के लिए एक टॉनिक का काम किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से साफ कहा कि वे आपसी मतभेद भूलकर संगठन को मजबूत करें और जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों का पर्दाफाश करें।
