उत्तराखंड के नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर आ रही है। अगर आपका नाम अभी तक वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ा है या आपके वोटर आईडी कार्ड में कोई गड़बड़ी है, तो इसे सुधारने का यह बिल्कुल सही समय है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने राज्य के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। खासकर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आयुक्तों को साफ कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उन पोलिंग बूथों का तुरंत जमीनी दौरा करें, जहां ऐसे मतदाता हैं जिनका वर्तमान पता या जानकारी साफ नहीं हो पा रही है। आपको बता दें कि आगामी 14 जुलाई को मतदाता सूची का एक नया ड्राफ्ट जारी होने वाला है, जिससे पहले इस काम को हर हाल में पूरा किया जाना है।
घर-घर पहुंच रही चुनाव आयोग की टीम, 94 फीसदी से ज्यादा काम पूरा
राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत प्रदेश भर में युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। 8 जून से शुरू हुए इस महाअभियान के अंतर्गत अब तक उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में कुल 79,60,762 मतदाताओं में से 75,51,246 वोटरों तक गणना प्रपत्र (सत्यापन फॉर्म) पहुंचाए जा चुके हैं। यह कुल लक्ष्य का 94.86 प्रतिशत है, जो कि एक बड़ी कामयाबी है। इस पूरे जमीनी काम को अंजाम देने के लिए 11,732 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) का एक मजबूत नेटवर्क दिन-रात काम कर रहा है। कमाल की बात यह है कि 13 बेहतरीन बीएलओ ने तो अभियान शुरू होने के शुरुआती 8 दिनों के भीतर ही अपना 100 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया था।
फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों पर कड़ा एक्शन, अधिकारियों के साथ हुई हाईलेवल बैठक
बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीओ) ने कुमाऊं और गढ़वाल के मंडलायुक्तों के साथ एक अहम ऑनलाइन बैठक की। इस बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) द्वारा तैयार की गई ऐसे मतदाताओं की लिस्ट की दोबारा गहराई से जांच (क्रॉस चेकिंग) करने के आदेश दिए गए हैं, जो या तो अपने पते पर अनुपस्थित (ऐब्सेंट) हैं, कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं या जिनका नाम दो जगह (डुप्लीकेट) दर्ज है।
अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि ऐब्सेंट, शिफ्टेड और मृत (डेथ) सूची में शामिल मतदाताओं के फॉर्म पर पूरी और स्पष्ट जानकारी लिखनी होगी। इसके साथ ही, फॉर्म पर बीएलओ के हस्ताक्षर होने के साथ-साथ बूथ अवेयरनेस ग्रुप के सदस्यों के दस्तखत होना भी अनिवार्य कर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो सके।
आम जनता को नहीं होगी कोई परेशानी, तैनात की गई बड़ी टीम
उत्तराखंड में दावों और आपत्तियों के निपटारे की व्यवस्था को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए सरकार ने बड़ी फौज मैदान में उतारी है। पूरे प्रदेश में इस काम के लिए 70 ईआरओ (ERO) के साथ-साथ 800 एईआरओ (AERO) तैनात किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को कड़े लहजे में समझाया है कि जांच और नोटिस देने के दौरान किसी भी आम और असली मतदाता को बेवजह की मानसिक या शारीरिक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
पहाड़ से लेकर मैदान तक लगेंगे विशेष कैंप, जानिए कहां जाना होगा आपको
भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने उत्तराखंड के हर हिस्से के लिए अलग और सुविधाजनक प्लान तैयार किया है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी क्षेत्रों के मतदाताओं की सहूलियत के लिए न्याय पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को दूर न जाना पड़े। वहीं दूसरी तरफ, मैदानी इलाकों में रहने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए तहसील कार्यालयों के अलावा नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर विशेष कैंपों का संचालन किया जाएगा।
जिन पोलिंग बूथों पर ऐसे मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा है जिनका वर्तमान पता प्रशासन को नहीं मिल पा रहा है, वहां खुद मंडलायुक्त जमीनी हकीकत देखने पहुंचेंगे। पूरी सरकारी मशीनरी को 14 जुलाई की आखिरी तारीख से पहले एक एकदम सटीक और बिना किसी गलती वाला वोटर डेटाबेस तैयार करने के काम में झोंक दिया गया है। इसलिए अगर आपका भी कोई काम अटका है, तो तुरंत इन कैंपों का लाभ उठाएं।
