अगर आप भी बाजार से लाए ताजे फल और हरी सब्जियां यह सोचकर खा रहे हैं कि वे आपको सेहतमंद रखेंगी, तो जरा संभल जाइए। आपकी सेहत बनाने वाली ये चीजें आपको बीमार भी कर सकती हैं। दरअसल, फल और सब्जियों को उगाने और उन्हें लंबे समय तक ताजा रखने के चक्कर में कीटनाशकों (Pesticides) का जो अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है, उसे लेकर अब सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रदेश भर में एक बड़ा अभियान छेड़ने का फैसला किया है।
विभाग की इस सख्ती का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। एफएसडीए (FSDA) ने न केवल पूरे प्रदेश से फल-सब्जियों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए लैब में भेजना शुरू कर दिया है, बल्कि कृषि और उद्यान विभाग को भी इसमें शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि केवल छापेमारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन किसानों को भी जागरूक करना होगा जो ज्यादा मुनाफे या फसल बचाने के चक्कर में बिना सोचे-समझे रसायनों का छिड़काव कर रहे हैं।
खतरे की घंटी: FSSAI की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
दरअसल, यह पूरी कवायद बेवजह नहीं है। इसके पीछे भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की वह रिपोर्ट है, जिसने सरकारी महकमों की नींद उड़ा दी है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त सचिन कुर्वे ने सचिव कृषि एवं उद्यान को एक पत्र लिखकर आगाह किया है कि FSSAI द्वारा समय-समय पर चलाए गए सर्विलांस अभियानों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष (Residues) तय मानकों से कहीं ज्यादा पाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि खेती में रसायनों का ‘अवैज्ञानिक’ तरीके से इस्तेमाल जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अनजाने में इन रसायनों का सेवन कर रहे हैं, जो शरीर में पहुंचकर कैंसर और लीवर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब किसानों के बीच जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने की तैयारी है, ताकि उन्हें बताया जा सके कि किस कीटनाशक का कितनी मात्रा में उपयोग करना है।
मंडी से लेकर दुकानों तक होगी निगरानी, 39 सैंपल लिए गए
सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि विभाग की नजर अब फल-सब्जी विक्रेताओं और स्थानीय मंडियों के व्यापारियों पर भी है। अक्सर देखा जाता है कि फलों को पकाने या उन्हें चमकदार बनाने के लिए भी घातक केमिकल का उपयोग होता है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के उपायुक्त (मुख्यालय) गणेश कंडवाल ने बताया कि आयुक्त के दिशा-निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में सैंपलिंग का काम तेज कर दिया गया है।
अब तक की कार्रवाई में प्रदेश भर से आम, केला, पपीता और तरबूज जैसे सीजनल फलों के 39 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 19 सैंपल अकेले कुमाऊं क्षेत्र से लिए गए हैं। विभाग का कहना है कि यह अभियान अभी थमेगा नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में इसे और भी विस्तार दिया जाएगा। लैब की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए सीएम धामी का निर्देश
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में इस समय चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और साथ ही पर्यटन सीजन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। सीएम धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “खाद्य पदार्थों में मिलावट और हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए सभी विभाग मिलकर काम करें। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री मिले, यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” सरकार की इस सख्ती से मिलावटखोरों और कीटनाशकों का दुरुपयोग करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि इस साझा अभियान से आने वाले समय में लोगों की थाली तक पहुंचने वाली सब्जियां और फल अधिक सुरक्षित और शुद्ध होंगे।
