Uttarakhand Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड सचिवालय परिसर में ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने राष्ट्रध्वज फहराया और पूरे प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, उत्तराखंड पुलिस, पीएसी के जवानों तथा स्कूली छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन अनगिनत वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान को याद करने का अवसर है जिनके संघर्षों के बल पर भारत आज एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी हमें विरासत में मिली है, लेकिन समृद्ध राष्ट्र निर्माण की असल जिम्मेदारी आज की वर्तमान पीढ़ी के कंधों पर है।
उन्होंने आगे कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। देश ने आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। अंतरिक्ष में भारतीय वैज्ञानिक नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, युवा वैश्विक मंचों पर अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं और डिजिटल तकनीक ने गवर्नेंस का चेहरा बदल दिया है। अब हमारा मुख्य लक्ष्य ऐसा विकास सुनिश्चित करना है जिसमें हर नागरिक को समान अवसर मिले और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
25 वर्ष का उत्तराखंड: उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्षों की यात्रा का जिक्र करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह समय आत्ममंथन करने और भविष्य की सही दिशा तय करने का है। राज्य का गठन महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं था, बल्कि इसके पीछे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक आवश्यकताओं और जन-आकांक्षाओं का लंबा संघर्ष रहा है।
उन्होंने बताया कि इन 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व काम हुआ है। हालांकि, इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाना, दूरस्थ इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य व शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी गंभीर चुनौतियों पर अभी और निरंतर काम करने की आवश्यकता है।
‘विकसित भारत’ की तर्ज पर ‘विकसित उत्तराखंड’ का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के विजन को लेकर मुख्य सचिव ने कहा कि इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड की अहम भूमिका होगी। हमारा मूल मंत्र ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखंड’ होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित उत्तराखंड का मतलब सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतें या विशाल परियोजनाएं नहीं हैं। असली विकसित उत्तराखंड वह कहलाएगा, जहां पहाड़ का युवा अपने गांव में रहकर सम्मानजनक रोजगार पा सके, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर नागरिक को समय पर बेहतर इलाज मिले। जब गांव सड़क, इंटरनेट और आधुनिक सुविधाओं से जुड़ेंगे और पर्यावरण व विकास एक-दूसरे के पूरक बनेंगे, तभी सच्चा विकास होगा।
सुशासन और ‘आउटकम डिलीवरी’ सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्य सचिव ने सचिवालय को राज्य शासन का मस्तिष्क बताते हुए कहा कि यहां लिया गया हर एक फैसला प्रदेश के दूर-दराज के गांवों तक असर डालता है। इसलिए प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही है कि सरकार का हर फैसला आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।
अधिकारियों और कर्मचारियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि हमें फाइलों के निपटारे यानी ‘फाइल डिस्पोजल’ से आगे बढ़कर ‘आउटकम डिलीवरी’ (परिणाम आधारित काम) पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से खुद को केवल सरकारी कर्मचारी न मानकर सच्चा लोक सेवक मानने और जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता से हल करने का आह्वान किया।
स्थानीय अर्थव्यवस्था, ग्रामीण उद्यमिता और युवाओं के लिए नए अवसर
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड की असली ताकत हमारे गांव, महिलाएं, युवा और समृद्ध प्राकृतिक संसाधन हैं। हमें मिलेट्स (श्री अन्न), स्थानीय कृषि उत्पाद, बागवानी, जड़ी-बूटियों, हस्तशिल्प और जैविक खेती को आधुनिक वैश्विक बाजारों से जोड़ना होगा। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना करते हुए उन्हें ग्रामीण उद्यमिता का केंद्र बनाने पर जोर दिया।
युवाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि उत्तराखंड का युवा सिर्फ नौकरी मांगने वाला न बने, बल्कि नौकरी देने वाला बने। स्टार्टअप, आईटी, पर्यटन, रिन्यूएबल एनर्जी और क्रिएटिव इकोनॉमी में नए अवसर पैदा करने होंगे ताकि युवाओं को रोजगार के लिए देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ या बेंगलुरु न भागना पड़े, बल्कि रोजगार के अवसर खुद पहाड़ तक पहुंचें।
हिमालय, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन पर बल
पर्यावरण और पर्यटन के संतुलन पर बात करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड हिमालय का प्रहरी है। यहां की नदियां और जंगल हमारी सभ्यता, संस्कृति और पर्यावरण के मुख्य आधार हैं। उत्तराखंड का विकास ‘हिमालय-संवेदनशील विकास मॉडल’ पर ही आधारित होना चाहिए। आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, अर्ली वार्निंग सिस्टम और आपदा-रोधी निर्माण को प्राथमिकता देनी होगी।
पर्यटन के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि अब हमें सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बजाय जिम्मेदार, टिकाऊ और ‘हाई-वैल्यू टूरिज्म’ पर ध्यान देना होगा। चारधाम यात्रा के साथ-साथ राज्य के छोटे गांवों, लोक संस्कृति, योग-वेलनेस, एडवेंचर, इको-टूरिज्म और होमस्टे को पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है।
संबोधन के अंत में मुख्य सचिव ने सचिवालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे पूरी कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता के साथ प्रदेश के विकास में अपना शत-प्रतिशत योगदान देने का संकल्प लें।
