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आधी रात को डोली उत्तराखंड की धरती! तेज भूकंप के झटकों से घरों से बाहर भागे लोग, मची अफरा-तफरी

By: Sansar Live Team

On: Monday, August 10, 2026 6:36 AM

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बीती रात अचानक धरती हिलने से बड़ा हड़कंप मच गया। आधी रात को आए इन तेज भूकंप के झटकों ने लोगों की नींद उड़ा दी और घबराए हुए लोग अपने घरों से बाहर सड़कों पर निकल आए। गनीमत यह रही कि इस भयानक झटके के बाद किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं कि इस भूकंप का केंद्र कहां था और इसकी तीव्रता कितनी मापी गई।

कितनी थी भूकंप की तीव्रता और कहां था केंद्र?

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह भूकंप सोमवार, 10 अगस्त की रात ठीक 01:21:34 बजे आया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.2 मैग्नीट्यूड मापी गई है। इसका केंद्र उत्तरकाशी के बड़कोट क्षेत्र के राजगढ़ के जंगलों में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। अचानक आए इन झटकों ने पहाड़ियों के बीच बसे लोगों को दहशत में डाल दिया।

जनपद आपातकालीन परिचालन केन्द्र को जिले की सभी तहसीलों से जो रिपोर्ट मिली है, उसके अनुसार पुरोला, मोरी, बड़कोट और चिन्यालीसौड़ जैसी तमाम तहसीलों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। हालांकि, प्रशासनिक टीमों द्वारा जुटाई गई शुरुआती जानकारी के अनुसार फिलहाल किसी भी तहसील से किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है।

उत्तराखंड में 49 नई जगहें हुईं डेंजर जोन घोषित

एक तरफ जहां भूकंप के झटकों ने लोगों को डराया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। उत्तराखंड के तीन संवेदनशील जिलों—चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में कुल 49 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं। दरअसल, अतीत में आई भयानक आपदाओं और धराली जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सीमांत पर्वतीय जिलों में मलबे के बहाव के खतरे का बारीकी से अध्ययन किया है। इस आकलन में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इन इलाकों में मलबे के तेज बहाव से भारी तबाही मच सकती है।

इस विशेष अध्ययन के दौरान वहां की भौगोलिक स्थिति, पुराने भूस्खलन के निशान, ग्लेशियर, ड्रेनेज चैनल के साथ-साथ बस्तियों और सड़कों की स्थिति का गहराई से जायजा लिया गया। सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, इन 49 संवेदनशील स्थानों में से 11 जगहों को ‘हाई रिस्क’ (अत्यंत खतरनाक), 30 को ‘मीडियम रिस्क’ और 8 को ‘लो रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद सुमन ने बताया कि संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे इन सभी जगहों की जमीनी हकीकत की जांच करें और जोखिम को कम करने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके तुरंत शासन को भेजें।

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